असम

गुवाहाटी में प्रधानमंत्री मोदी के सामने 10,000 बोडो कलाकारों ने प्रस्तुत किया भव्य बगुरुंबा नृत्य

SHIDDHANT
17 Jan 2026 11:59 PM IST
गुवाहाटी में प्रधानमंत्री मोदी के सामने 10,000 बोडो कलाकारों ने प्रस्तुत किया भव्य बगुरुंबा नृत्य
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Guwahati गुवाहाटी: आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में लगभग 10,000 बोडो कलाकारों ने अपने पारंपरिक बगुरुंबा नृत्य का प्रदर्शन किया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे। यह प्रस्तुति असम की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और बोडो समुदाय की कला एवं परंपरा का जीवंत उदाहरण थी। कार्यक्रम में कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधान और पारंपरिक गहनों के साथ मंच पर नृत्य प्रस्तुत किया। बगुरुंबा नृत्य, जो मुख्य रूप से बोडो समुदाय की विशेषताओं और ग्रामीण जीवन के उत्सवों पर आधारित है, ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नृत्य सामूहिकता, समर्पण और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
एक कलाकार ने बताया, "हमने इस नृत्य का आनंद बहुत लिया। बहुत कुछ हुआ और हमें यह बहुत पसंद आया। इतने बड़े मंच पर प्रदर्शन करने का मौका मिलना हमारे लिए अद्भुत अनुभव था। प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रदर्शन करना गर्व की बात है। प्रधानमंत्री मोदी ने कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और लोक कलाओं का यह अद्भुत प्रदर्शन देश की सांस्कृतिक विविधता को दिखाता है। उन्होंने कलाकारों को उनके प्रयास और समर्पण के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम का आयोजन असम सरकार और केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय के सहयोग से किया गया था। यह कार्यक्रम न केवल असम के सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है, बल्कि देश के युवा और लोक कलाकारों को अपनी कला दिखाने का एक बड़ा मंच भी प्रदान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बगुरुंबा नृत्य जैसे पारंपरिक नृत्यों का संरक्षण और बड़े स्तर पर प्रदर्शन करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है और लोक कला के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ती है। इस अवसर पर पूरे कार्यक्रम में बोडो कलाकारों की तालमेल और एकजुटता दर्शाने वाली झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय कलाकारों और दर्शकों के साथ संवाद किया और उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियों को सराहा। उन्होंने कहा कि लोक कला और परंपराओं को संरक्षित करना और उसे बड़े मंच पर प्रदर्शित करना देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता है। इस भव्य प्रस्तुति में न केवल बोडो समुदाय के कलाकार शामिल थे, बल्कि आसपास के क्षेत्र के कलाकारों ने भी भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम एक सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले गया। कार्यक्रम ने गुवाहाटी और पूरे असम में सांस्कृतिक गौरव का वातावरण बनाया और दर्शकों को भारतीय लोक कला की विविधता का अनुभव कराया।
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