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अरुणाचल प्रदेश
सियांग बांध के विरोध में हिंसक प्रदर्शन, विधायकों के घरों में लूटपाट और आगजनी से तनाव
Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 12:40 PM IST

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ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया है। पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर जमकर उत्पात मचाया। पुलिस के अनुसार, जेनरेशन जेड (GenZ) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने एनएचपीसी (NHPC) कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी। इसके अलावा दो विधायकों और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के आवासों में तोड़फोड़ और लूटपाट किए जाने के भी आरोप हैं। शनिवार तड़के तक करीब नौ घंटे तक रुक-रुककर हुई हिंसा में 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं, एक प्रदर्शनकारी के पैर में आंसू गैस का गोला लगने से वह घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बांध परियोजना के विरोध में भड़की हिंसा
अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना को लेकर लंबे समय से विरोध के स्वर उठ रहे हैं। इसी परियोजना के खिलाफ पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शन किया जा रहा था। हालांकि, विरोध प्रदर्शन ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर सरकारी और राजनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के आरोप लगे।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और विभिन्न स्थानों पर तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं सामने आईं। हिंसा के कारण स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई।
NHPC कार्यालय और पुलिस थाने में लगाई आग
पुलिस ने बताया कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान एनएचपीसी के कार्यालय को निशाना बनाया गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय परिसर में आग लगा दी। इसके अलावा एक पुलिस थाने में भी आगजनी की घटना सामने आई।
इन घटनाओं से सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, आगजनी में हुए कुल नुकसान और प्रभावित संपत्तियों का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है।एनएचपीसी कार्यालय पर हमला विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विरोध का मुख्य मुद्दा प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना है। प्रदर्शनकारी परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां जता रहे हैं।
दो विधायकों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के घरों में तोड़फोड़
हिंसा केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रही। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दो विधायकों और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के आवासों को भी निशाना बनाया।आरोप है कि इन आवासों में तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की घटनाएं भी हुईं। राजनीतिक नेताओं के घरों पर हुए कथित हमलों ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।हालांकि, संबंधित आवासों से कितनी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और लूटपाट में किन वस्तुओं को निशाना बनाया गया, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नौ घंटे तक रुक-रुककर होती रही हिंसा
पुलिस के मुताबिक, पासीघाट में हिंसा का सिलसिला करीब नौ घंटे तक रुक-रुककर चलता रहा। शनिवार तड़के तक अलग-अलग स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं। पुलिसकर्मियों पर पथराव किए जाने की भी जानकारी मिली है।
लगातार कई घंटों तक हिंसा होने के कारण स्थिति को नियंत्रित करना सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्तियों और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी थी।
पथराव में 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की ओर से किए गए पथराव में 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए।इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के घायल होने से हिंसा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, घायल पुलिसकर्मियों की स्थिति और उनके उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।वहीं, प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी भी घायल हो गया। जानकारी के मुताबिक, उसके पैर में आंसू गैस का गोला लगा, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।घायल प्रदर्शनकारी की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्या है 11,200 मेगावाट की सियांग परियोजना?
सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित एक विशाल जलविद्युत परियोजना है। इसकी प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट बताई गई है।यह परियोजना सियांग नदी से संबंधित है, जो ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़े पैमाने पर जलविद्युत उत्पादन के उद्देश्य से प्रस्तावित इस परियोजना को ऊर्जा क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, इस तरह की विशाल बांध परियोजनाओं को लेकर पर्यावरण, स्थानीय आबादी, विस्थापन और नदी के प्राकृतिक प्रवाह से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।
स्थानीय समुदायों की चिंताओं में उनकी जमीन, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं। परियोजना के समर्थक इसे बिजली उत्पादन और बुनियादी ढांचे के विकास के अवसर के रूप में देखते हैं, जबकि विरोध करने वाले समूह संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय जोखिमों पर जोर देते हैं।
परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी
सियांग परियोजना के खिलाफ चल रहे विरोध से स्पष्ट है कि प्रस्तावित बांध को लेकर स्थानीय स्तर पर असहमति मौजूद है।बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, प्रभावित गांवों की स्थिति और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता होती है।विरोध करने वाले समूहों की मांगों और सरकार के पक्ष के बीच सहमति बनाना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।हालांकि, शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियां अलग-अलग विषय हैं। प्रदर्शन के दौरान आगजनी, पथराव और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
हिंसा के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता
पासीघाट में हुई हिंसा ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रस्तावित परियोजना को लेकर बढ़ते तनाव को सामने ला दिया है।एक ओर प्रदर्शनकारी बांध परियोजना को लेकर विरोध जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हिंसक घटनाओं में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के घायल होने और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों की चिंताओं का समाधान किस तरह किया जाता है।
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