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अरुणाचल प्रदेश
Arunachal में थर्मल ड्रोन ट्रेनिंग से वन संरक्षण को बढ़ावा
Harrison
29 April 2026 8:43 PM IST

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Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और जंगलों की निगरानी को मजबूत करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। राज्य सरकार ने वाइल्डलाइफ रेस्क्यू और फॉरेस्ट ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से थर्मल ड्रोन ट्रेनिंग कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कदम को आधुनिक तकनीक के जरिए संरक्षण कार्यों को बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत वन विभाग के अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस ड्रोन के संचालन की जानकारी दी जा रही है। थर्मल ड्रोन की मदद से रात के समय या घने जंगलों में भी जानवरों की गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है, जो पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं होता। अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग घायल या फंसे हुए वन्यजीवों को ढूंढने और उन्हें सुरक्षित निकालने में किया जाएगा। इसके अलावा, जंगलों में होने वाली अवैध गतिविधियों जैसे शिकार और लकड़ी की तस्करी पर नजर रखने में भी यह तकनीक मददगार साबित हो सकती है।
थर्मल ड्रोन के जरिए तापमान के आधार पर जीवित प्राणियों की पहचान की जा सकती है, जिससे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी आसान हो जाती है। इससे वन विभाग की प्रतिक्रिया समय में सुधार होने की उम्मीद है, खासकर आपात स्थितियों में। राज्य के वन अधिकारियों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है, जहां पारंपरिक निगरानी और बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण होते हैं। ऐसे में थर्मल ड्रोन तकनीक इन चुनौतियों को कम करने में सहायक होगी।
इस पहल के तहत प्रशिक्षण सत्रों में ड्रोन संचालन, डेटा विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। अधिकारियों को यह भी सिखाया जा रहा है कि किस तरह से प्राप्त डेटा का उपयोग वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी के लिए किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक का उपयोग संरक्षण कार्यों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि जंगलों में हो रही अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
सरकार का उद्देश्य इस पहल के जरिए वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करना और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देना है। आने वाले समय में इस तकनीक का दायरा और बढ़ाया जा सकता है, ताकि अधिक क्षेत्रों को इसके अंतर्गत लाया जा सके।
इस कार्यक्रम से वन विभाग की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है और साथ ही स्थानीय समुदायों को भी इससे अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, क्योंकि बेहतर निगरानी से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, अरुणाचल प्रदेश द्वारा शुरू की गई यह थर्मल ड्रोन ट्रेनिंग पहल आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संरक्षण प्रयासों के संयोजन का उदाहरण है, जो वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बना सकती है।
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