अरुणाचल प्रदेश

बढ़ती गर्मी और डेंगू का खतरा अरुणाचल के हेल्थ सिस्टम की हो रही परीक्षा

nidhi
19 Aug 2026 3:32 PM IST
बढ़ती गर्मी और डेंगू का खतरा अरुणाचल के हेल्थ सिस्टम की हो रही परीक्षा
x
पहाड़ों में बदलता मौसम बना चुनौती अरुणाचल का स्वास्थ्य ढांचा कितना तैयार

ईटानगर: कभी ठंडे मौसम और पहाड़ी वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले अरुणाचल प्रदेश में अब बदलते जलवायु हालात स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहे हैं। बढ़ते तापमान, बदलते बारिश के पैटर्न और मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे ने राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जलवायु परिवर्तन के असर से राज्य में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों की निगरानी की जरूरत बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में बदलते मौसम के प्रभावों से निपटने के लिए मजबूत तैयारी जरूरी है।
बढ़ रहा है तापमान, बढ़ रही चिंता
भारतीय मौसम विभाग के आकलन के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 राज्य के सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा, जिसमें औसत तापमान सामान्य से ऊपर रहा।
बढ़ती गर्मी का असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। लू, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी अन्य समस्याओं के मामले बढ़ने की आशंका रहती है।
हीट से निपटने के लिए क्या तैयारी?
अरुणाचल प्रदेश में गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की निगरानी के लिए व्यवस्थाएं शुरू की गई हैं। राज्य ने हीट एक्शन प्लान के तहत शुरुआती चेतावनी, अस्पतालों की तैयारी, निगरानी और इलाज से जुड़े प्रोटोकॉल तैयार किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हीट से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के लिए स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, दूरदराज के क्षेत्रों में रिपोर्टिंग और डेटा संग्रह अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
डेंगू का बढ़ता खतरा
गर्मी और बारिश के बदलते चक्र के बीच मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। डेंगू को लेकर राज्य में निगरानी बढ़ाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में डेंगू की जांच और पॉजिटिव मामलों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ तापमान बढ़ने से ही डेंगू नहीं फैलता, बल्कि मच्छरों की संख्या, बारिश, पानी जमा होने की स्थिति और लोगों की आवाजाही जैसे कई कारण भी जिम्मेदार होते हैं।
दूरदराज इलाकों में बड़ी चुनौती
अरुणाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पहाड़ी इलाकों, बिखरी आबादी और मानसून के दौरान सड़क संपर्क प्रभावित होने से मरीजों तक समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
कई क्षेत्रों में खराब नेटवर्क और परिवहन की समस्या के कारण बीमारी से जुड़ा डेटा समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे बीमारी की सही स्थिति का आकलन करना कठिन हो जाता है।
अस्पतालों को मजबूत करने की जरूरत
बदलते मौसम के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में आपात सुविधाओं को मजबूत करना, मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण देना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना जरूरी है।
इसके अलावा लोगों को गर्मी से बचाव, साफ पानी का इस्तेमाल और मच्छरों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियां
अरुणाचल प्रदेश में सिर्फ गर्मी और डेंगू ही नहीं, बल्कि बाढ़, भूस्खलन और जल जनित बीमारियां भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सड़कें और स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित होने से इलाज की चुनौती और बढ़ जाती है।
Next Story