अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल में बांध विरोध ने लिया हिंसक मोड़, पुलिस कार्रवाई के बाद आगजनी

nidhi
24 Oct 2026 9:42 AM IST
अरुणाचल में बांध विरोध ने लिया हिंसक मोड़, पुलिस कार्रवाई के बाद आगजनी
x
गुवाहाटी: अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' के खिलाफ भारी विरोध शुक्रवार को हिंसा में बदल गया। 12 घंटे के बंद के दौरान, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पासीघाट में NHPC के एक कार्यालय में आग लगा दी।
तनाव बढ़ने पर पुलिस की दो गाड़ियों में भी आग लगा दी गई। पुलिस की इस कार्रवाई में महिलाओं और छात्रों सहित कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
इस हिंसा ने अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा इस विवादित मेगा बांध परियोजना के विरोध को संभालने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, अपनी चिंताओं और अधिकारों के सम्मान की मांग कर रहे समुदायों के खिलाफ बल प्रयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए अंधाधुंध लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करने के बाद यह हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई लोगों को आंसू गैस के गोले लगे, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई। प्रस्तावित परियोजना के विरोध में सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में सुबह 5 बजे से बंद बुलाया गया था। प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई और इलाके में तैनात सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की भी मांग कर रहे थे।
सियांग के पुलिस अधीक्षक (SP) कामदम सिखोम ने बताया कि अपर सियांग जिले के गेकू और कोमकार इलाकों से लगभग 150 से 200 प्रदर्शनकारी, बंद के समर्थन में सुबह करीब 7 बजे सियांग जिले के डिट-डिम (Dite-Dime) में इकट्ठा हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की, पथराव किया और निषेधाज्ञा (prohibitory orders) का उल्लंघन किया, जिसके चलते पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया, "इस झड़प में चार महिलाएं घायल हो गईं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।"
वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उनका दावा है कि कई प्रदर्शनकारियों को आंसू गैस के गोले लगे हैं। इन आरोपों के बाद, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग और तेज हो गई है।
SP ने कहा कि सियांग जिले के बाकी हिस्सों में बंद शांतिपूर्ण रहा। अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी सियांग जिले के मेबो में रानाघाट पुल के पास भी हिंसा भड़क गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए और कम से कम सात वाहनों को नुकसान पहुंचा।
सूत्रों के अनुसार, एक स्थानीय समाचार चैनल के लिए काम करने वाले एक कैमरामैन के पैर में आंसू गैस का गोला लगने से वह भी घायल हो गए।
पूर्वी सियांग के एसपी पंकज लांबा ने टिप्पणी के लिए किए गए कई फोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया।
इस बंद के कारण सियांग और अपर सियांग जिलों तथा पूर्वी सियांग के कुछ हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया; दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और लोग ज्यादातर अपने घरों के अंदर ही रहे। हालांकि, अपर सियांग के उपायुक्त अशोक ताजो ने कहा कि उनके जिले में बंद शांतिपूर्ण रहा।
सरकारी आश्वासनों पर सवाल
यह बंद संयुक्त रूप से 'आदि बाने केबांग यूनाइटेड', 'एसयूएमपी (SUMP) प्रभावित क्षेत्र युवा संघ', 'सियांग स्वदेशी किसान मंच युवा विंग' और 'आदि गैलो कल्याण समिति' द्वारा बुलाया गया था।
ये संगठन गिरफ्तार किए गए दस कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित 'गांव बुरा' (ग्राम प्रधानों) की बहाली, परियोजना से जुड़ी सभी प्रारंभिक गतिविधियों को तुरंत रोकने, और क्षेत्र में तैनात अर्धसैनिक बलों तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं।
इस ताजा टकराव ने राज्य सरकार द्वारा पहले दिए गए आश्वासनों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 13 अक्टूबर को 'आदि बाने केबांग युवा विंग' (ABKYW) और 'आदि छात्र संघ' (AdiSU) के साथ एक बैठक में हिरासत में लिए गए युवाओं को रिहा करने, एफआईआर वापस लेने और सुरक्षा बलों की तैनाती कम करने का वादा किया था।
फिर से भड़की हिंसा ने इन आश्वासनों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, यह भी सवाल उठता है कि क्या सरकार बातचीत के जरिए प्रभावित समुदायों की शिकायतों का समाधान कर रही है, या फिर टकराव का रुख अपनाकर स्थिति को और बिगड़ने दे रही है। अरुणाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना का मुख्य उद्देश्य सियांग बेसिन में पानी का भंडारण और प्रबंधन करना है। यह कदम विशेष रूप से चीन द्वारा सियांग नदी के ऊपरी हिस्से में प्रस्तावित मेगा बांध को लेकर जताई जा रही चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया है।
हालांकि, परियोजना के पक्ष में दिए गए रणनीतिक तर्कों से स्थानीय विरोध कम नहीं हुआ है। प्रभावित समुदाय मांग कर रहे हैं कि परियोजना को लेकर उनकी चिंताओं, उनके अधिकारों और उनकी जमीन तथा आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों पर ध्यान दिया जाए। कांग्रेस ने स्वतंत्र जांच की मांग की इस बीच, अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
APCC के प्रवक्ता कोन जिरजो जोथम ने कहा कि 'डाइट-डाइम' (Dite-Dime) में हुई घटना ने लोगों के विरोध को संभालने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हिरासत में लिए गए युवाओं को रिहा करने और सुरक्षा बलों को वापस बुलाने के अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है। कांग्रेस ने घायलों के लिए चिकित्सा सहायता की मांग की और राज्य सरकार से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया।
Next Story