अरुणाचल प्रदेश

SUMP PFR को लेकर विरोध तेज GOAP ने बढ़ाए कदम

nidhi
22 Sept 2026 1:43 PM IST
SUMP PFR को लेकर विरोध तेज GOAP ने बढ़ाए कदम
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SUMP PFR पर GOAP का अंतिम
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश सरकार (GoAP) ने Siang Upper Multipurpose Project (SUMP) की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) तैयार करने से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रस्तावित परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के बीच सरकार और प्रशासन की ओर से सर्वेक्षण तथा अध्ययन से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है। सियांग नदी पर प्रस्तावित यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में है। सरकार इसे ऊर्जा उत्पादन, जल प्रबंधन और रणनीतिक जरूरतों से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में प्रस्तुत करती रही है। वहीं परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित होने वाले कई स्थानीय लोग भूमि, पर्यावरण, विस्थापन और आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जता रहे हैं।
PFR गतिविधियां क्यों हैं महत्वपूर्ण?
किसी बड़ी जलविद्युत या बहुउद्देश्यीय परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले उसकी व्यवहार्यता का शुरुआती आकलन किया जाता है। PFR यानी Pre-Feasibility Report इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें प्रस्तावित परियोजना की संभावनाओं, स्थल की स्थिति और विभिन्न तकनीकी पहलुओं से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी जुटाई जाती है। PFR तैयार होने का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है। इसके बाद भी विस्तृत अध्ययन और लागू कानूनी तथा नियामकीय प्रक्रियाएं आवश्यक होती हैं।
स्थानीय लोगों का विरोध
SUMP को लेकर सियांग क्षेत्र में विरोध भी देखने को मिला है। परियोजना के आलोचक संभावित विस्थापन, पारंपरिक भूमि पर प्रभाव, नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरण से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय समुदायों के कुछ वर्गों का कहना है कि किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित लोगों की चिंताओं को सुना जाना चाहिए।
परियोजना को लेकर समर्थन और विरोध के बीच प्रशासन के लिए सर्वेक्षण गतिविधियों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण रहा है। विरोध करने वाले समूहों की मांग है कि परियोजना से जुड़े संभावित प्रभावों और योजनाओं की जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा की जाए।
सरकार परियोजना को बता रही महत्वपूर्ण
दूसरी ओर राज्य सरकार प्रस्तावित परियोजना को अरुणाचल प्रदेश और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा तथा जल सुरक्षा से जोड़कर देखती रही है। सरकार का पक्ष है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले जरूरी अध्ययन और तकनीकी सर्वेक्षण होने चाहिए, ताकि परियोजना की वास्तविक व्यवहार्यता और संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके। सियांग नदी ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण इस नदी से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं पर स्थानीय स्तर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान रहता है।
संवाद और अध्ययन पर टिकी आगे की राह
फिलहाल सरकार PFR से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है, जबकि विरोध करने वाले स्थानीय समूह अपनी चिंताओं को सामने रख रहे हैं। परियोजना का भविष्य तकनीकी अध्ययन, पर्यावरणीय मूल्यांकन, नियामकीय प्रक्रियाओं और प्रभावित समुदायों के साथ होने वाले संवाद पर निर्भर करेगा। SUMP से जुड़ी बहस में विकास और ऊर्जा जरूरतों के साथ पर्यावरण, स्थानीय अधिकार और आजीविका जैसे मुद्दे केंद्र में हैं। ऐसे में PFR गतिविधियों के आगे बढ़ने के साथ इस परियोजना पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
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