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अरुणाचल प्रदेश
विश्वस्तरीय सुबनसिरी पर्यटन हब बनाने की योजना, इको-टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
SHIDDHANT
23 April 2026 8:25 PM IST

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Itanagar ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सुबनसिरी लोअर पोंडेज को विश्वस्तरीय पर्वत और नदी आधारित इमर्सिव पर्यटन हब में विकसित करने की योजना की घोषणा की है। अधिकारियों के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी परियोजना इको-टूरिज्म, एडवेंचर गतिविधियों, सांस्कृतिक अनुभवों और सतत आजीविका के अवसरों को एकीकृत करेगी।
सुबनसिरी निचली जलविद्युत परियोजना, जिसकी उत्पादन क्षमता 2,000 मेगावाट है, देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है और यह सुबनसिरी नदी पर स्थित है। इस परियोजना के चार यूनिट पहले ही चालू हो चुके हैं और इसे दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से शुरू किए जाने की उम्मीद है। इस परियोजना से बने पोंडेज क्षेत्र को देश के सबसे जैव-विविध नदी कॉरिडोर में एक उच्च मूल्य वाले पर्यटन इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस परियोजना के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है। साथ ही उन्होंने पर्यटन, ऊर्जा, जल शक्ति, पोत परिवहन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालयों से तकनीकी सहयोग की भी मांग की है।
प्रस्तावित योजना में इको-टूरिज्म, एडवेंचर और वाटर स्पोर्ट्स, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन, अंतर्देशीय मत्स्य पालन, आजीविका सृजन, लग्जरी रिवर क्रूज और मरीन गतिविधियों जैसे कई घटकों को शामिल किया गया है। यह पहल दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों जैसे फेवा झील, काएंग क्रचन राष्ट्रीय उद्यान, कोमो झील और मिलफोर्ड साउंड से प्रेरित है।
मुख्यमंत्री खांडू ने जोर देकर कहा कि इस परियोजना में स्थानीय और जनजातीय समुदायों को केंद्र में रखा जाएगा, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत के संरक्षक और मुख्य लाभार्थी होंगे। परियोजना के तहत लगभग 2,500 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है, जिससे विशेष रूप से स्थानीय युवाओं को लाभ मिलेगा। साथ ही मध्यम अवधि में प्रति वर्ष 1.5 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में सरकार अग्रणी डिजाइन और योजना एजेंसियों को शामिल कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी, जिसमें वित्तीय अनुमान और कार्यान्वयन ढांचा शामिल होगा। यह प्रक्रिया स्थानीय समुदायों से परामर्श के साथ पूरी की जाएगी।
यह पहल जलविद्युत अवसंरचना का उपयोग करते हुए सतत पर्यटन विकास को बढ़ावा देने और अरुणाचल प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि 28 मार्च को मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ सुबनसिरी नदी पर लगभग 45 किलोमीटर की हाई-स्पीड रिवर यात्रा की थी, जिसे उन्होंने राज्य में जलविद्युत और पर्यटन संभावनाओं को जोड़ने की व्यापक पहल का हिस्सा बताया था।
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