अरुणाचल प्रदेश

Pema Khandu बोले—भारत की ताकत सिर्फ सीमा नहीं, संस्कृति और सभ्यता भी आधार

Harrison
3 May 2026 9:33 PM IST
Pema Khandu  बोले—भारत की ताकत सिर्फ सीमा नहीं, संस्कृति और सभ्यता भी आधार
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Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Pema Khandu ने कहा है कि भारत की वास्तविक ताकत केवल भौतिक ढांचे और भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गहरी सांस्कृतिक पहचान और सभ्यता के मूल्यों में भी निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए हिमालयी बौद्ध धर्म की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है और यह आज भी सामाजिक और सांस्कृतिक सहारे का एक मजबूत आधार बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने यह विचार उस समय व्यक्त किए जब वे शनिवार को Leh के दौरे पर गए थे। इसके बाद उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर कई पोस्ट साझा किए, जिनमें उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मजबूती के विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
अपने संदेश में खांडू ने कहा कि भारत जैसे विविधता से भरे देश में संस्कृति और पहचान ही वह सूत्र हैं, जो विभिन्न समुदायों को एक साथ जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की परंपराएं और धार्मिक मूल्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से हिमालयी बौद्ध धर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल आध्यात्मिक परंपरा है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और समुदायों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देता है। उनके अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में यह परंपरा लोगों को स्थिरता और सांस्कृतिक जुड़ाव प्रदान करती है।
खांडू ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती केवल उसके बुनियादी ढांचे, सड़क, पुल और सीमाओं से नहीं आंकी जा सकती, बल्कि उसकी सांस्कृतिक जड़ों की गहराई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब लोग अपनी पहचान और परंपराओं से जुड़े रहते हैं, तो राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है।
उनके इन बयानों को सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संदेश स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास और सहभागिता को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।
लेह दौरे के दौरान खांडू ने विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर भी चर्चा की और स्थानीय लोगों के साथ संवाद किया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री का यह बयान भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता के दृष्टिकोण से जोड़ने का प्रयास है। यह संदेश विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सांस्कृतिक पहचान और भौगोलिक स्थिति दोनों ही अहम भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल, खांडू के इन बयानों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है और इसे देश की सांस्कृतिक नीति और सीमावर्ती विकास दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है।
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