अरुणाचल प्रदेश

पेमा खांडू ने किया पासीघाट में 42 स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का उद्घाटन

Tara Tandi
7 Oct 2026 4:45 PM IST
पेमा खांडू ने किया पासीघाट में 42 स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का उद्घाटन
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पासीघाट: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को पासीघाट स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इन प्रोजेक्ट्स से राज्य के सबसे पुराने शहर में आए बदलाव को दिखाया गया और नए इंफ्रास्ट्रक्चर में लोगों की ज़्यादा भागीदारी की अपील की गई।
खांडू ने बताया कि मिशन के तहत शुरू किए गए 43 प्रोजेक्ट्स में से 42 पूरे हो चुके हैं। बचा हुआ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है।
पासीघाट स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के तहत पूरे किए गए मुख्य प्रोजेक्ट्स में सियांग रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, अपग्रेडेड मार्केट एरिया, स्मार्ट गेस्ट हाउस, डिस्ट्रिक्ट ई-लाइब्रेरी, रिक्रिएशन सेंटर, स्मार्ट सड़कें, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सुविधाएं और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल हैं।
सियांग रिवरफ्रंट, स्मार्ट गेस्ट हाउस और रिक्रिएशन सेंटर पहले से ही रेवेन्यू-जनरेटिंग मॉडल के तहत चलाए जा रहे हैं। पूरे हो चुके 22 प्रोजेक्ट्स को ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए पासीघाट म्युनिसिपल काउंसिल और अन्य विभागों व एजेंसियों को सौंप दिया गया है, जबकि बाकी प्रोजेक्ट्स भी सौंपे जाने के लिए तैयार हैं।
खांडू ने मेबो एंट्री गेट इंफ्रास्ट्रक्चर का भी उद्घाटन किया।
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्मार्ट सिटीज़ मिशन की शुरुआत को याद करते हुए खांडू ने कहा कि राज्य सरकार की लगातार कोशिशों के बाद जून 2017 में पासीघाट को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश नॉर्थ-ईस्ट का एकमात्र राज्य है जहां दो स्मार्ट सिटीज़ हैं — पासीघाट और ईटानगर। उन्होंने राज्य के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए केंद्र और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय का धन्यवाद किया।
खांडू ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन की असली परीक्षा यह होगी कि क्या नए इंफ्रास्ट्रक्चर से लोगों की ज़िंदगी बेहतर हुई और नए मौके पैदा हुए।
उन्होंने कहा, "सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर जनता के लिए बनाया जाता है। यह जनता की संपत्ति है और इसकी देखभाल करना भी जनता की ज़िम्मेदारी है।" उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इन संपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करें।
नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर में मज़बूत जन-भागीदारी के उदाहरण के तौर पर तवांग का ज़िक्र करते हुए खांडू ने भरोसा जताया कि आदि समुदाय के लोग पासीघाट की नई सुविधाओं के प्रति भी वैसी ही ज़िम्मेदारी दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि शहर के बदलाव को रोज़गार और आजीविका के मौकों से जोड़ा जाना चाहिए, खासकर युवाओं के लिए।
सियांग में पर्यटन की संभावनाओं का ज़िक्र करते हुए खांडू ने कहा कि रिवरफ्रंट, बेहतर सड़कों और बेहतर कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करके पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है और स्थानीय स्तर पर रोज़गार पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने चुने हुए प्रतिनिधियों को नए-नए स्थानीय आइडिया आज़माने के लिए प्रोत्साहित किया, जैसे कि मोबाइल रेस्टोरेंट, ताकि पर्यटन और अन्य स्थानीय संसाधनों को अच्छे-खासे कारोबार में बदला जा सके।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की उपजाऊ ज़मीन और भरपूर प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए, खेती, बागवानी और दूसरे सेक्टर भी युवाओं के लिए उद्यमिता के मौके दे सकते हैं।
खांडू ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे केंद्र और राज्य की योजनाओं को मिलाकर (कन्वर्जेंस) ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाएं, ताकि सरकारी निवेश का बेहतर इस्तेमाल हो सके और ज़्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर व रोज़गार पैदा किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि पासीघाट स्मार्ट सिटी मिशन खुद ही योजनाओं को मिलाने (कन्वर्जेंस) के फ़ायदे दिखाता है। प्रोजेक्ट की कुल लागत में से लगभग 490 करोड़ रुपये केंद्र ने दिए, 51.77 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिए और 3.94 करोड़ रुपये कन्वर्जेंस फ़ंडिंग के ज़रिए जुटाए गए।
खांडू ने कहा, "कन्वर्जेंस का मतलब एक और एक मिलकर दो होना नहीं, बल्कि एक और एक मिलकर ग्यारह होना चाहिए।" उन्होंने अधिकारियों से ऐसी योजनाओं की पहचान करने को कहा जिन्हें बेहतर असर के लिए रणनीतिक तौर पर मिलाया जा सके।
पासीघाट के विकास को राज्य के बड़े विकास एजेंडे से जोड़ते हुए खांडू ने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का विज़न हासिल करने में अरुणाचल प्रदेश को अहम भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा, "विकसित भारत तभी बनेगा जब अरुणाचल प्रदेश का विकास होगा। अरुणाचल प्रदेश के बिना भारत विकसित भारत नहीं बन सकता।"
खांडू ने कहा कि राज्य ने अपने लंबे समय के विकास विज़न पर काम शुरू कर दिया है और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत करके इसे और बेहतर बनाया जाएगा। अगले चरण में खास तौर पर युवाओं के लिए टिकाऊ आजीविका और मौकों को बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
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