अरुणाचल प्रदेश

SUMP विरोध तेज, कार्यकर्ताओं और मीडिया पर कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद

nidhi
6 Oct 2026 3:13 PM IST
SUMP विरोध तेज, कार्यकर्ताओं और मीडिया पर कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद
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PFR सर्वे के खिलाफ आंदोलन हुआ तेज
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित Siang Upper Multipurpose Project (SUMP) को लेकर विरोध लगातार तेज हो रहा है। खासकर परियोजना के लिए प्रस्तावित Pre-Feasibility Report (PFR) सर्वे और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर स्थानीय समुदायों का विरोध बढ़ा है। इसी के साथ कार्यकर्ताओं, प्रदर्शनकारियों और स्थानीय मीडिया पर कथित कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रस्तावित SUMP की क्षमता करीब 11,000 से 12,500 मेगावाट बताई जा रही है। परियोजना का विरोध कर रहे स्थानीय समुदायों का कहना है कि इससे उनकी पारंपरिक जमीन, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। विरोध का बड़ा केंद्र ऊपरी सियांग और पूर्वी सियांग क्षेत्र बने हुए हैं।
30 सितंबर को विरोध उस समय उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ा। कुछ वाहनों को कथित तौर पर आग के हवाले किया गया और एक स्थानीय विधायक के आवास में तोड़फोड़ की सूचना सामने आई। इसके कुछ दिन बाद उग्गेंग गांव में सुरक्षा बलों और परियोजना विरोधियों के बीच टकराव में दोनों पक्षों के कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई।
सरकार का कहना है कि अभी केवल PFR अध्ययन किया जा रहा है और परियोजना को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। राज्य सरकार ने इसे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है और चीन के मेडोग डैम से जुड़े संभावित जोखिमों के संदर्भ में भी इसका जिक्र किया है। वहीं विरोध कर रहे संगठन इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
इस बीच आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई भी विवाद का विषय बनी है। Siang Indigenous Farmers Forum (SIFF) की कानूनी सलाहकार भानु ताटक को अगस्त में CBI की ओर से FCRA उल्लंघन के आरोप में नोटिस दिया गया था। FIR में आरोप लगाया गया कि उन्होंने बिना जरूरी अनुमति विदेशी योगदान प्राप्त किया और कथित तौर पर इस धन का इस्तेमाल SUMP तथा अन्य जलविद्युत परियोजनाओं के विरोध में किया गया। ये आरोप जांच का विषय हैं और अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं हुए हैं।
स्थानीय पत्रकार संगठनों ने भी हाल के दिनों में शिकायत की है कि SUMP से जुड़ी खबरों और वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत में सीमित या ब्लॉक किया गया। Arunachal Press Club और Arunachal Pradesh Union of Working Journalists ने ऐसे प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि यह प्रेस की स्वतंत्रता और जनता के सूचना के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
दूसरी ओर सरकार ने संवाद का रास्ता खुला रखने की कोशिश भी की है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने SIFF को 5 अक्टूबर को बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन संगठन ने 11 अक्टूबर के बाद बैठक करने की मांग की, ताकि वह अपने सदस्यों के बीच साझा रुख तैयार कर सके।
विरोध कर रहे संगठनों का मुख्य आग्रह है कि PFR सर्वे और सुरक्षा बलों की तैनाती रोकी जाए तथा स्थानीय समुदायों की सहमति के बिना परियोजना प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए। वहीं सरकार परियोजना को विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जोड़कर देख रही है।
अब यह विवाद केवल एक बांध परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें जमीन, आदिवासी अधिकार, पर्यावरण, राष्ट्रीय सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राज्य की विकास नीति जैसे कई सवाल एक साथ जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और विरोधी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत यह तय कर सकती है कि टकराव कम होगा या आंदोलन और तेज होगा।
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