- Home
- /
- राज्य
- /
- अरुणाचल प्रदेश
- /
- अरुणाचल के तवांग मठ...
अरुणाचल प्रदेश
अरुणाचल के तवांग मठ में पहुंचे बुद्ध के पवित्र अवशेष, दर्शन के लिए उमड़ेंगे श्रद्धालु
Ratna Netam
31 Oct 2026 6:33 PM IST

x
ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के बौद्ध धर्मावलंबियों और श्रद्धालुओं के लिए शनिवार, 31 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व लेकर आया। भगवान गौतम बुद्ध यानी शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली से अरुणाचल प्रदेश के तवांग पहुंच गए हैं। इन पवित्र अवशेषों को तवांग स्थित ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) में धार्मिक परंपराओं और विशेष समारोह के बीच स्थापित किया गया। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अवशेषों के आगमन को राज्य के लिए बड़े सम्मान और ऐतिहासिक अवसर बताया। इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन करने और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने का अवसर मिलेगा।यह विशेष आयोजन 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक अरुणाचल प्रदेश के तीन प्रमुख बौद्ध धार्मिक केंद्रों तवांग, बोमडिला और नामसाई में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भगवान बुद्ध की शिक्षाओं, बौद्ध विरासत और शांति के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।
13 साल बाद तवांग पहुंचे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का तवांग पहुंचना राज्य के बौद्ध समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। इन अवशेषों को इससे पहले राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में सुरक्षित रखा गया था। वहां से विशेष व्यवस्था के तहत इन्हें अरुणाचल प्रदेश लाया गया है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले वर्ष 2013 में भी तवांग में पवित्र अवशेषों के दर्शन का आयोजन हुआ था। उस समय करीब 26 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।अवशेषों का स्वागत मुख्यमंत्री पेमा खांडू और तवांग मठ के मठाधीश फारा डेमेंय तुलकु सहित बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार विशेष स्वागत और अनुष्ठान आयोजित किए गए।
उत्तर प्रदेश के पिपरहवा स्तूप से जुड़ा है ऐतिहासिक महत्व
भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों का संबंध उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित प्राचीन पिपरहवा स्तूप से है। यह पुरातात्विक स्थल प्राचीन कपिलवस्तु से जुड़ा माना जाता है, जिसे शाक्य वंश की ऐतिहासिक भूमि और भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।पिपरहवा स्तूप से प्राप्त अवशेषों का बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इन अवशेषों को भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इन्हें अरुणाचल प्रदेश लाने का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में बौद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना भी है।मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अवशेषों के आगमन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह राज्य के लिए गौरव और सम्मान का अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से लोगों में करुणा, शांति, ज्ञान और सार्वभौमिक भाईचारे जैसे भगवान बुद्ध के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
विशेष विमान और हेलीकॉप्टर से लाए गए अवशेष
पवित्र अवशेषों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से अरुणाचल प्रदेश पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की गई। 30 अक्टूबर की रात नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में धार्मिक अनुष्ठानों के बाद अवशेषों को पालम एयरफोर्स स्टेशन ले जाया गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से इन्हें गुवाहाटी के बोरझार एयरफोर्स स्टेशन पहुंचाया गया। वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए तवांग लाया गया।अवशेषों की सुरक्षा, पवित्रता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार, रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायुसेना, अरुणाचल प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय संग्रहालय के अधिकारियों ने मिलकर व्यवस्था की। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण परिवहन और सुरक्षा के इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया गया।
तीन प्रमुख बौद्ध केंद्रों में होंगे दर्शन
इस आयोजन के तहत भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को अरुणाचल प्रदेश के तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। कार्यक्रम का निर्धारित शेड्यूल इस प्रकार है:
- तवांग मठ: 1 से 7 नवंबर 2026 तक।
- बोमडिला मठ: 8 से 13 नवंबर 2026 तक।
- गोल्डन पैगोडा, नामसाई: 14 से 20 नवंबर 2026 तक।
तवांग में ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से मठ में श्रद्धालु पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद इन्हें बोमडिला स्थित थुबचोग गात्सेल लिंग मठ ले जाया जाएगा। अंतिम चरण में नामसाई के गोल्डन पैगोडा में दर्शन की व्यवस्था होगी। 21 नवंबर को धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के बाद अवशेषों को वापस नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय ले जाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का भी होगा आयोजन
इस धार्मिक आयोजन के साथ बौद्ध धर्म और उसकी ऐतिहासिक यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। तवांग में 2 और 3 नवंबर को 'बुद्धिज्म: डिसेमिनेशन इन द हिमालयन रीजन एंड बियॉन्ड' विषय पर सम्मेलन प्रस्तावित है।इसमें भारत सहित छह अन्य देशों के बौद्ध भिक्षु, विद्वान, शोधकर्ता और प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में हिमालयी क्षेत्र और उसके बाहर बौद्ध धर्म के प्रसार, इसकी सांस्कृतिक विरासत और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर चर्चा होगी।इसके अलावा पिपरहवा विरासत की खोज और उसकी वापसी से संबंधित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पवित्र अवशेषों के ऐतिहासिक महत्व और उनसे जुड़े पुरातात्विक तथ्यों को समझने का अवसर मिलेगा।
ल्हाबाब दुचेन पर्व से जुड़ा है आयोजन
इस आयोजन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह तिब्बती बौद्ध परंपरा के महत्वपूर्ण पर्व ल्हाबाब दुचेन के अवसर के आसपास आयोजित हो रहा है। यह पर्व भगवान बुद्ध के स्वर्गलोक से पृथ्वी पर वापस आने की स्मृति में मनाया जाता है।बौद्ध धर्म में इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर पूजा-अर्चना, ध्यान और धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। ऐसे में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का तवांग पहुंचना बौद्ध समुदाय के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर माना जा रहा है।केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश सरकार, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन और राष्ट्रीय संग्रहालय के संयुक्त सहयोग से इस आयोजन को संपन्न कराया जा रहा है।कुल मिलाकर, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का अरुणाचल प्रदेश पहुंचना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत, सांस्कृतिक एकता और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। अगले तीन सप्ताह तक तवांग, बोमडिला और नामसाई में श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा, शांति और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
Next Story





