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अरुणाचल प्रदेश
TRIHMS में पहला किडनी ट्रांसप्लांट, CM पेमा खांडू ने दी जानकारी
Tara Tandi
28 Sept 2026 4:45 PM IST

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अरुणाचल: मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 28 सितंबर को बताया कि अरुणाचल प्रदेश ने ईटानगर के टोमो रिबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (TRIHMS) में अपना पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। उन्होंने इसे राज्य में हेल्थकेयर के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।
यह ट्रांसप्लांट रविवार को नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट्स की एक टीम की मदद से किया गया।
अपने ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए खांडू ने कहा कि राज्य सरकार TRIHMS में डॉक्टरों और नर्सों की क्षमता बढ़ाने के लिए पिछले तीन सालों से सर गंगा राम अस्पताल के साथ काम कर रही थी।
उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने में राज्य का साथ देने के लिए अस्पताल मैनेजमेंट और सीनियर डॉक्टरों का धन्यवाद किया।
खांडू ने बताया कि सर्जरी के बाद वे हेल्थ मिनिस्टर और हेल्थ एडवाइजर के साथ TRIHMS गए और किडनी लेने वाले मरीज़ और किडनी देने वाले के परिवार वालों से मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सफल प्रक्रिया से पता चलता है कि TRIHMS के डॉक्टरों और नर्सों ने इस खास प्रक्रिया को करने के लिए ज़रूरी स्किल हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में किडनी ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करेगी।
TRIHMS के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नालोह मिबांग ने बताया कि किडनी लेने वाले व्यक्ति की उम्र 34 साल है, जबकि किडनी देने वाली उनकी 45 साल की बहन हैं। सोमवार को उनके ज़रूरी हेल्थ पैरामीटर्स की जांच के बाद दोनों की हालत स्थिर थी और उम्मीद है कि अगले 48 से 72 घंटों में वे ठीक हो जाएंगे।
तीन साल का ट्रेनिंग प्रोग्राम
खांडू ने कहा कि सरकार TRIHMS में दूसरे खास विभागों को भी मज़बूत कर रही है, जिसमें कार्डियोलॉजी को अगले मुख्य फोकस एरिया के तौर पर चुना गया है।
उन्होंने कहा कि कार्डियोलॉजी प्रोग्राम, जिसमें DNB ट्रेनिंग भी शामिल है, को और मज़बूत किया जाएगा।
हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर सेक्रेटरी विवेक एच. पी. ने कहा कि पहला ट्रांसप्लांट राज्य की मौजूदा क्षमता के अंदर ही किया गया, जिसमें TRIHMS में न्यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि शुरुआती फोकस कुछ ही प्रक्रियाओं पर रहेगा क्योंकि डॉक्टर और नर्स और ट्रेनिंग ले रहे हैं और अनुभव हासिल कर रहे हैं।
पिछले तीन सालों में, TRIHMS के डॉक्टरों और नर्सों के कई बैच ने सर गंगा राम अस्पताल में ट्रेनिंग ली है। विवेक ने बताया कि अरुणाचल के डॉक्टर भी दिल्ली के अस्पताल जाने वाले मरीज़ों के साथ गए थे, जिससे उन्हें ट्रांसप्लांट की प्रक्रियाओं का सीधा अनुभव मिल सका।
खांडू ने सर गंगा राम अस्पताल से आग्रह किया कि वे अपना 'हैंड-होल्डिंग' प्रोग्राम (मार्गदर्शन और सहयोग का कार्यक्रम) तब तक जारी रखें, जब तक अरुणाचल की मेडिकल टीम इस खास प्रक्रिया को खुद से संभालने में सक्षम न हो जाए।
अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) के लिए मदद बढ़ाई गई
राज्य सरकार ने हाल ही में अपने हेल्थकेयर सपोर्ट प्रोग्राम के तहत अंग प्रत्यारोपण के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद भी बढ़ाई है।
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मदद 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मदद 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 17.5 लाख रुपये और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 22.5 लाख रुपये कर दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि हर प्रक्रिया के लिए 2.5 लाख रुपये की यह बढ़ोतरी 'CM CARES' पहल के तहत की गई है। इसका मकसद उन परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना है जिन्हें खास इलाज की ज़रूरत होती है।
खांडू ने कहा कि इसका बड़ा मकसद यह पक्का करना है कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों को बड़े शहरों में जाने के बजाय राज्य के भीतर ही बेहतर इलाज मिल सके, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो।
TRIHMS की नज़र 'रीजनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' बनने पर
सर गंगा राम अस्पताल के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. हर्ष जौहरी, जिन्होंने इस प्रक्रिया की देखरेख की थी, ने इस ट्रांसप्लांट को "आने वाले कई ट्रांसप्लांट में से पहला" बताया और इसका श्रेय राज्य सरकार के सहयोग को दिया।
उन्होंने कहा कि किडनी से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं और अरुणाचल प्रदेश को भविष्य की हेल्थकेयर ज़रूरतों के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है, खासकर इसलिए क्योंकि मोटापा, डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन किडनी फेल होने की वजह बनते हैं।
जौहरी ने कहा कि TRIHMS को आगे चलकर नॉर्थ-ईस्ट के लिए 'सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' के तौर पर विकसित होना चाहिए, ताकि पूरे इलाके से मरीज़ यहाँ आ सकें।
वहीं, मिडपू में बन रहे कैंसर अस्पताल के बारे में खांडू ने बताया कि निर्माण कार्य का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि शुरू में ज़मीन से जुड़े मुद्दों के कारण इस प्रोजेक्ट में देरी हुई थी, लेकिन अब यह तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और उम्मीद है कि अगले साल तक यह चालू हो जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने कैंसर सुविधा केंद्र के लिए ज़रूरी मैनपावर (कर्मचारियों) की ज़रूरत का आकलन करना भी शुरू कर दिया है।
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