अरुणाचल प्रदेश

खेती को हाईटेक बनाने के लिए किसानों ने मांगा तकनीकी सहयोग

nidhi
5 Sept 2026 2:43 PM IST
खेती को हाईटेक बनाने के लिए किसानों ने मांगा तकनीकी सहयोग
x
आधुनिक खेती की राह

कृषि डेस्क: खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ प्रगतिशील किसानों ने कृषि विभाग और विशेषज्ञ संस्थानों से तकनीकी सहायता मजबूत करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नई कृषि तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई के आधुनिक तरीके, मृदा परीक्षण और फसल प्रबंधन से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें समय पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की जरूरत है। किसानों के मुताबिक खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। मौसम में बदलाव, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, कीट और रोगों का प्रकोप तथा बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव उनके सामने नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक और तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देना जरूरी हो गया है।

खेत तक पहुंचे कृषि विशेषज्ञ
प्रगतिशील किसानों का कहना है कि कृषि विभाग के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का किसानों से नियमित संवाद होना चाहिए। नई तकनीक की जानकारी केवल बैठकों और दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों को खेतों में उसका व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। किसानों के अनुसार कई बार नई मशीन, बीज या कृषि तकनीक उपलब्ध तो हो जाती है, लेकिन सही इस्तेमाल की जानकारी नहीं मिलने से उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में फील्ड स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है।
मृदा परीक्षण पर विशेष जोर
आधुनिक खेती में मिट्टी की जांच को महत्वपूर्ण माना जाता है। किसानों का कहना है कि नियमित मृदा परीक्षण की सुविधा आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खेत की मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है। मिट्टी की जरूरत के मुताबिक खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करने से अनावश्यक खर्च कम किया जा सकता है। इसके साथ मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
सिंचाई की आधुनिक तकनीक की जरूरत
किसानों ने पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है। बदलते मौसम और कई क्षेत्रों में पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए कम पानी में बेहतर सिंचाई करने वाली तकनीक किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि किसानों का कहना है कि इन प्रणालियों की स्थापना, रखरखाव और सही संचालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन जरूरी है। इसके साथ सरकारी योजनाओं और उपलब्ध सहायता की जानकारी भी सरल तरीके से किसानों तक पहुंचनी चाहिए।
कीट और रोगों की समय पर मिले जानकारी
फसल में अचानक बीमारी या कीट लगने पर किसानों को कई बार सही सलाह मिलने में देर हो जाती है। इससे नुकसान बढ़ने का खतरा रहता है। प्रगतिशील किसानों की मांग है कि कृषि विशेषज्ञों से सीधे संपर्क के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार की जाए। मोबाइल ऐप, हेल्पलाइन और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किसान खेत में दिखाई देने वाली समस्या की तस्वीर विशेषज्ञों तक पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों की समय पर सलाह मिलने से अनावश्यक कीटनाशकों के इस्तेमाल और फसल नुकसान दोनों को कम करने में मदद मिल सकती है।
कृषि मशीनों का प्रशिक्षण भी जरूरी
खेती में मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। छोटे ट्रैक्टर, ड्रोन, सीड ड्रिल और दूसरी आधुनिक मशीनें समय तथा श्रम बचाने में मदद करती हैं। लेकिन किसानों का कहना है कि मशीन खरीदना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। विशेष रूप से कृषि ड्रोन जैसी नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर और तकनीकी सहायता की जरूरत होती है। छोटे किसानों के लिए महंगी मशीनों को सामूहिक रूप से उपलब्ध कराने के विकल्प भी उपयोगी हो सकते हैं।
Next Story