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अरुणाचल प्रदेश
Farmer ID अभियान शुरू, वांगसू बोले- सही डेटा से किसानों तक पहुंचेगा लाभ
nidhi
6 Oct 2026 1:06 PM IST

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योजनाओं की डिलीवरी होगी ज्यादा पारदर्शी
रोइंग: अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू ने कहा है कि बेहतर कृषि प्रशासन की शुरुआत तभी हो सकती है, जब सरकार किसानों और उनकी वास्तविक जरूरतों को सही तरीके से समझे। उन्होंने सोमवार को लोअर दिबांग वैली जिले के रोइंग में Farmer ID Generation Camp की शुरुआत करते हुए किसानों से फार्म रजिस्ट्री और किसान पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।
वांगसू ने कहा कि राज्य में लंबे समय से किसानों की जमीन, फसल, उत्पादन और कृषि गतिविधियों से जुड़ा व्यवस्थित डेटा उपलब्ध नहीं रहा है। इसके कारण योजनाएं बनाते समय कई बार अनुमान पर निर्भर रहना पड़ता है। Farmer ID और Farm Registry के जरिए किसानों से जुड़ी सही जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल किसानों को एक पहचान संख्या देना नहीं है। इससे सरकार यह समझ सकेगी कि कौन किसान कहां खेती कर रहा है, कौन सी फसल उगा रहा है और उसे किस तरह की सहायता की जरूरत है। इसी आधार पर योजनाओं और सुविधाओं की डिलीवरी ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाई जा सकेगी।
यह पहल केंद्र सरकार के AgriStack ढांचे के तहत लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों, उनकी कृषि भूमि और खेती से जुड़ी गतिविधियों का सत्यापित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। इससे किसान-केंद्रित योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री ने किसानों से कहा कि वे अपनी जमीन और खेती से जुड़ी जानकारी दर्ज कराने में संकोच न करें। उन्होंने किसानों से सहयोग मांगते हुए कहा कि बेहतर सेवाएं देने के लिए सरकार को सही और विश्वसनीय आंकड़ों की जरूरत है। फार्म रजिस्ट्री से कृषि विभाग के लिए लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आसान होगी।
कृषि निदेशक टोग्गुल पर्टिन पर्मे ने भी Farmer ID को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आने वाले समय में यह किसानों को सरकारी लाभ दिलाने का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। उन्होंने सभी पात्र किसानों से पहचान पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने यह भी बताया कि Farmer ID और Farm ID को अलग-अलग किसान-केंद्रित योजनाओं से जोड़ा जाएगा। किसानों को नि:शुल्क पंजीकरण कराने और अपनी कृषि भूमि की सही जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया।
वांगसू इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र-विशेष कृषि नीति पर जोर दे चुके हैं। उनका कहना है कि राज्य में छोटे खेत, बिखरी हुई कृषि भूमि और अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जानी चाहिए। आधुनिक तकनीक के साथ स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक खेती को जोड़ना भी जरूरी है।
सरकार का मानना है कि किसानों के बारे में सही डेटा मिलने से योजनाओं की निगरानी, लाभ वितरण और कृषि नीति निर्माण में सुधार होगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की फसल, तकनीक या सरकारी सहायता की ज्यादा जरूरत है।
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