- Home
- /
- राज्य
- /
- अरुणाचल प्रदेश
- /
- मिथुन में FMD रोकने के...

x
मिथुन पशुओं में बीमारी का प्रकोप सरकार ने संभाला मोर्चा
नई दिल्ली: मिथुन (गयाल) में फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। बीमारी की रोकथाम और निगरानी के लिए केंद्रीय टीमों के साथ-साथ रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRTs) को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य संक्रमण को फैलने से रोकना, प्रभावित पशुओं की पहचान करना और समय पर उपचार व टीकाकरण सुनिश्चित करना है।
बीमारी की रोकथाम के लिए तेज किए गए प्रयास
FMD एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है। मिथुन जैसे महत्वपूर्ण पशुधन में इसके संक्रमण को देखते हुए सरकार ने विशेषज्ञों की टीमों को मौके पर भेजा है।
टीमों को बीमारी की स्थिति का आकलन करने, नमूने एकत्र करने और स्थानीय पशुपालकों को जरूरी दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी दी गई है।
RRTs कर रही हैं निगरानी और जागरूकता कार्य
रैपिड रिस्पॉन्स टीमें प्रभावित क्षेत्रों में जाकर पशुओं की जांच कर रही हैं। इसके अलावा पशुपालकों को संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे बीमार पशुओं को अलग रखें और किसी भी लक्षण की जानकारी तुरंत पशु चिकित्सा अधिकारियों को दें।
टीकाकरण और जैव सुरक्षा पर जोर
सरकार ने FMD नियंत्रण के लिए टीकाकरण अभियान और जैव सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर जोर दिया है। पशु आवागमन पर निगरानी बढ़ाने और संक्रमण फैलने वाले संभावित कारणों को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
मिथुन का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व
मिथुन पूर्वोत्तर भारत, खासकर अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पशुधन माना जाता है। यह स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है।
ऐसे में मिथुन में FMD का प्रकोप पशुपालकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय आजीविका को भी सुरक्षित रखना है।
Next Story





