अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल का शेरगांव फोक क्वेस्ट अक्टूबर में फिर होगा आयोजित

nidhi
4 Sept 2026 9:55 AM IST
अरुणाचल का शेरगांव फोक क्वेस्ट अक्टूबर में फिर होगा आयोजित
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लोक संस्कृति का बड़ा उत्सव

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश का चर्चित शेरगांव फोक क्वेस्ट अक्टूबर में अपने दूसरे संस्करण के साथ वापसी करने के लिए तैयार है। यह सांस्कृतिक उत्सव 17 और 18 अक्टूबर को पश्चिम कामेंग जिले के शेरगांव में आयोजित किया जाएगा। इस बार आयोजन का थीम “The Hills Sing. The Heart Listens” रखा गया है। यह फेस्टिवल सिर्फ संगीत कार्यक्रम नहीं बल्कि अरुणाचल की आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं, कहानियों और प्रकृति से जुड़ी विरासत को सामने लाने का मंच है। इसमें स्थानीय कलाकारों, लेखकों, कहानीकारों, किसानों, प्रकृति प्रेमियों और विभिन्न समुदायों के लोगों की भागीदारी होगी।

शेरदुकपेन संस्कृति को मिलेगी पहचान
शेरगांव फोक क्वेस्ट का मुख्य उद्देश्य शेरदुकपेन समुदाय की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है। यहां लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, कहानियां और पीढ़ियों से चली आ रही मौखिक परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। आयोजकों का कहना है कि तेजी से बदलती दुनिया में कई लोक कथाएं, गीत और पारंपरिक ज्ञान धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। ऐसे में यह महोत्सव इन विरासतों को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश है।
संगीत और साहित्य का होगा संगम
इस आयोजन में लोक और फ्यूजन संगीत प्रस्तुतियां, साहित्यिक चर्चाएं और कहानी सत्र आकर्षण का केंद्र रहेंगे। कई कलाकार और सांस्कृतिक समूह अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके अलावा स्थानीय इतिहास और परंपराओं पर चर्चा भी आयोजित की जाएगी।
प्रकृति और स्थानीय जीवन की झलक
शेरगांव फोक क्वेस्ट में स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, पहाड़ी उत्पाद और जैव विविधता को भी प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यटकों को जंगल, पक्षियों, औषधीय पौधों और स्थानीय कृषि परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। शेरगांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ी वातावरण और शेरदुकपेन समुदाय की संस्कृति के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि यह उत्सव संस्कृति के साथ-साथ जिम्मेदार पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
पिछले संस्करण को मिला था अच्छा रिस्पॉन्स
शेरगांव फोक क्वेस्ट के पहले संस्करण में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया था। दूसरे संस्करण में इसे और व्यापक बनाने की तैयारी की गई है ताकि पूर्वोत्तर भारत की विविध संस्कृति को एक मंच मिल सके।
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