- Home
- /
- राज्य
- /
- अरुणाचल प्रदेश
- /
- अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ...
अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील बनी भारत की 101वीं रामसर साइट

अरूणाचल : पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील को देश का 101वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। इस मान्यता के साथ ही अरुणाचल प्रदेश को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड मिला है।
पूर्वी हिमालय क्षेत्र में स्थित ग्लॉ झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ जल और समृद्ध जैव विविधता के लिए जानी जाती है। रामसर स्थल का दर्जा मिलने से इस झील के पारिस्थितिक महत्व को वैश्विक पहचान मिली है। साथ ही यह उपलब्धि भारत के वेटलैंड संरक्षण प्रयासों को भी मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे अरुणाचल प्रदेश और पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता बताया। उन्होंने कहा कि ग्लॉ झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने से जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता, जल सुरक्षा और टिकाऊ आजीविका के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि यह मान्यता ग्लॉ झील के पारिस्थितिक महत्व को स्वीकार करती है और भारत की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वेटलैंड केवल जल स्रोत नहीं होते, बल्कि वे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रामसर स्थल का दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है, जो वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय और जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं। यह दर्जा मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र के संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और टिकाऊ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
ग्लॉ झील को रामसर सूची में शामिल किए जाने से पूर्वोत्तर भारत के पर्यावरणीय महत्व को भी नई पहचान मिली है। पूर्वी हिमालय क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध माना जाता है और यहां कई दुर्लभ वनस्पतियां व जीव-जंतु पाए जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में ग्लॉ झील का संरक्षण क्षेत्रीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वेटलैंड जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये क्षेत्र कई जलीय जीवों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास भी होते हैं। इसलिए इनका संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
ग्लॉ झील को मिली यह अंतरराष्ट्रीय पहचान स्थानीय समुदायों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वेटलैंड संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इससे पर्यटन, प्राकृतिक अध्ययन और स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में रामसर स्थलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार की ओर से आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। नए क्षेत्रों को रामसर सूची में शामिल करना इसी व्यापक संरक्षण नीति का हिस्सा है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि किसी भी वेटलैंड को बचाने के लिए केवल कानूनी मान्यता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि स्थानीय स्तर पर संरक्षण गतिविधियों, वैज्ञानिक निगरानी और जनभागीदारी की भी आवश्यकता होती है। ग्लॉ झील के मामले में भी दीर्घकालिक संरक्षण योजना महत्वपूर्ण होगी।
अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील का रामसर स्थल बनना पूर्वोत्तर भारत के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करता है। यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गौरव का विषय है, बल्कि देश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक और मजबूत कदम है।
केंद्र सरकार का कहना है कि रामसर स्थलों की संख्या बढ़ने से भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती मिलेगी। ग्लॉ झील को मिली यह मान्यता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
101वें रामसर स्थल के रूप में ग्लॉ झील की घोषणा के बाद अब इसके संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता बचाने और जल संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।





