अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश में GLOF खतरे से निपटने की तैयारी तेज

Kavita2
10 May 2026 4:52 PM IST
अरुणाचल प्रदेश में GLOF खतरे से निपटने की तैयारी तेज
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Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश ने ग्लेशियल झीलों से संभावित बाढ़ (GLOF) के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। राज्य में 32 ग्लेशियल झीलों को हाई-रिस्क कैटेगरी में चिन्हित किए जाने के बाद प्रशासन ने तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक सर्वे तकनीक पर ध्यान केंद्रित किया है।

नेशनल GLOF रिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत अरुणाचल प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) ने शनिवार से तीन दिवसीय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत की। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उन अधिकारियों और विशेषज्ञों की तकनीकी क्षमता को बढ़ाना है, जो राज्य की संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की निगरानी और आगामी निरीक्षण कार्यों में शामिल होंगे।

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल के तहत बैथिमेट्री सर्वे टेक्नोलॉजी पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका उपयोग झीलों की गहराई, संरचना और पानी की मात्रा का आकलन करने में किया जाता है। यह तकनीक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी संभावित आपदाओं की पहचान और रोकथाम में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पहले बैथिमेट्री सर्वे उपकरणों के संचालन और उपयोग की सैद्धांतिक जानकारी दी गई। इसके बाद गंगा झील में फील्ड एक्सरसाइज कर वास्तविक समय में डेटा कलेक्शन और सर्वे कार्य का अभ्यास कराया गया, ताकि अधिकारियों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

इस प्रशिक्षण में कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हुए। इनमें भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), अरुणाचल प्रदेश स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, जल संसाधन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में आपदा जोखिम को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ाना है, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को भी मजबूत करना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों के टूटने से अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जो निचले इलाकों में भारी तबाही का कारण बन सकता है। ऐसे में समय रहते जोखिम का आकलन और निगरानी बेहद जरूरी है।

राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षित टीमों की मदद से संभावित आपदाओं को पहले ही पहचाना जा सके और उनके प्रभाव को कम किया जा सके।

फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में इस पहल को आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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