अरुणाचल प्रदेश

Arunachal : नाह समुदाय ने सीमा क्षेत्र में कथित चीनी घुसपैठ पर जताई चिंता

Kavita2
29 Jun 2026 9:55 AM IST
Arunachal : नाह समुदाय ने सीमा क्षेत्र में कथित चीनी घुसपैठ पर जताई चिंता
x

Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में रहने वाले नाह आदिवासी समुदाय ने भारत-चीन सीमा क्षेत्र में कथित चीनी गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की है। समुदाय का आरोप है कि पिछले छह वर्षों के दौरान चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने उनके पारंपरिक चरागाहों, शिकार स्थलों और खेती से जुड़ी भूमि के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस संबंध में नाह वेलफेयर सोसाइटी (एनडब्ल्यूएस) ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले पर ध्यान देने की मांग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, नाह वेलफेयर सोसाइटी ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि ताकसिंग राजस्व सर्कल के अंतर्गत आने वाली उनकी पुश्तैनी भूमि पिछले छह वर्षों के दौरान धीरे-धीरे चीनी नियंत्रण में चली गई है। समुदाय का कहना है कि इससे उनके पारंपरिक जीवन और आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि जिन क्षेत्रों का उपयोग पहले समुदाय के लोग शिकार, वन उपज एकत्र करने और पशुओं को चराने के लिए करते थे, वहां अब उनकी पहुंच नहीं रह गई है। समुदाय का आरोप है कि इन इलाकों पर अब चीन की पीएलए का नियंत्रण है, जिसके कारण स्थानीय लोगों की पारंपरिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

नाह वेलफेयर सोसाइटी ने अपने ज्ञापन में लिखा है कि उनकी पुश्तैनी भूमि, जहां वे वर्षों से स्वतंत्र रूप से आते-जाते थे, अब उनके उपयोग से बाहर हो गई है। संगठन के अनुसार, यह क्षेत्र केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण रहा है।

समुदाय का कहना है कि चरागाहों और खेती योग्य भूमि तक पहुंच सीमित होने से पशुपालन और कृषि जैसी पारंपरिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा जंगलों से मिलने वाले संसाधनों के उपयोग में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।

ज्ञापन के माध्यम से नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन से इस मामले को संबंधित उच्च अधिकारियों और केंद्र सरकार तक पहुंचाने का अनुरोध किया है। संगठन ने मांग की है कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों और पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

ऊपरी सुबनसिरी जिला भारत-चीन सीमा से लगा संवेदनशील क्षेत्र है। यहां रहने वाले कई आदिवासी समुदाय लंबे समय से अपनी पारंपरिक जीवनशैली के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती, पशुपालन और वन संसाधनों पर निर्भर रहे हैं। ऐसे में सीमा क्षेत्र से जुड़े किसी भी बदलाव का सीधा असर स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ सकता है।

नाह समुदाय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सीमा क्षेत्र की स्थिति में बदलाव महसूस किया गया है। इसी कारण उन्होंने प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए औपचारिक रूप से ज्ञापन सौंपा है। संगठन को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियां मामले की जांच करेंगी और आवश्यक कार्रवाई करेंगी।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदाय समय-समय पर अपनी आजीविका और पारंपरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रशासन के समक्ष उठाते रहे हैं। नाह वेलफेयर सोसाइटी का यह ज्ञापन भी इसी क्रम में सामने आया है, जिसमें समुदाय ने अपनी पारंपरिक भूमि और संसाधनों तक पहुंच बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

फिलहाल यह मामला प्रशासन के संज्ञान में है और स्थानीय समुदाय आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

Next Story