- Home
- /
- राज्य
- /
- आंध्र प्रदेश
- /
- स्थानीय निकाय चुनाव से...

x
अमरावती। आंध्र प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने राज्य की गठबंधन सरकार पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने और पार्टी के उम्मीदवारों के चुनावी कामकाज में बाधाएं पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि स्थानीय निकाय चुनावों में हार की आशंका के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर विपक्षी उम्मीदवारों को परेशान कर रहा है। विशेष रूप से जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करने और गलत जाति श्रेणी दर्ज करने के आरोप लगाए गए हैं।
बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री कुरासला कन्नाबाबू और वाईएसआरसीपी नेता पुट्टा शिवा शंकर ने राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के उम्मीदवारों को जाति प्रमाण पत्र हासिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से जुड़े उम्मीदवारों को कथित तौर पर बिना किसी देरी के प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
वाईएसआरसीपी नेताओं के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित जाति श्रेणी के अनुसार प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी करने में देरी या गलत श्रेणी दर्ज किए जाने से उम्मीदवारों की चुनावी तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि इसी प्रक्रिया को विपक्षी उम्मीदवारों के लिए मुश्किल बनाया जा रहा है।
पूर्व मंत्री कुरासला कन्नाबाबू और पुट्टा शिवा शंकर ने कहा कि कुछ मामलों में वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों की जाति श्रेणी को ही बदल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति यानी एससी श्रेणी से संबंधित आवेदकों को पिछड़ा वर्ग यानी बीसी श्रेणी में दिखाया गया, जबकि कुछ पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को अन्य वर्ग यानी ओसी श्रेणी के प्रमाण पत्र जारी किए गए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कथित गड़बड़ियों का सीधा असर चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि एक ओर सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को समय पर प्रमाण पत्र मिल रहे हैं, जबकि दूसरी ओर विपक्षी उम्मीदवारों को देरी और गलत दस्तावेजों की समस्या से क्यों जूझना पड़ रहा है।
वाईएसआरसीपी नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में विशाखापत्तनम के कुछ मामलों का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित एक पूर्व वाईएसआरसीपी पार्षद को उसकी वास्तविक जाति श्रेणी से अलग प्रमाण पत्र जारी किया गया। पार्टी के अनुसार, इससे संबंधित व्यक्ति के सामने चुनावी प्रक्रिया में परेशानी खड़ी हो सकती है।
इसके अलावा विशाखापत्तनम के एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए नेताओं ने दावा किया कि एक आवेदक की जाति श्रेणी पिछड़ा वर्ग यानी बीसी से बदलकर ओसी कर दी गई। वाईएसआरसीपी ने इन मामलों को प्रशासनिक स्तर पर कथित भेदभाव का उदाहरण बताया।
पार्टी नेताओं ने मरकापुरम का मामला भी उठाया। उनका आरोप है कि वहां एक वाईएसआरसीपी उम्मीदवार को जाति प्रमाण पत्र जारी करने से मना कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं चुनाव से पहले उम्मीदवारों के सामने अनावश्यक बाधाएं पैदा कर रही हैं।
वाईएसआरसीपी का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सभी आवेदकों के लिए समान होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज निर्धारित नियमों के अनुसार सही हैं, तो उसे बिना भेदभाव के प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में विपक्षी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
कुरासला कन्नाबाबू और पुट्टा शिवा शंकर ने गठबंधन सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में संभावित हार के डर से विपक्षी उम्मीदवारों के सामने प्रशासनिक परेशानियां खड़ी की जा रही हैं। हालांकि, यह वाईएसआरसीपी का राजनीतिक आरोप है और सरकार की ओर से इस मंशा की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले जाति प्रमाण पत्रों से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों की पात्रता और संबंधित दस्तावेजों की शुद्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वाईएसआरसीपी द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित मामलों में प्रशासनिक त्रुटियां हुई हैं या जानबूझकर किसी उम्मीदवार को प्रभावित किया गया।
फिलहाल इन आरोपों पर गठबंधन सरकार या संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। वाईएसआरसीपी ने उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र मिलने में देरी और जाति श्रेणी बदलने के मामलों को उठाते हुए प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
वाईएसआरसीपी ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी नेताओं ने कहा कि मैनुअल आवेदन देने के 24 घंटे के भीतर लंबित जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने चाहिए। उन्होंने पुलिस पर पार्टी कार्यकर्ताओं को थानों में बुलाकर दबाव बनाने और बाइंड-ओवर की कार्रवाई करने के आरोप भी लगाए। पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है।
Next Story





