आंध्र प्रदेश

जल जीवन मिशन पर YSRCP का निशाना सरकार पर क्रेडिट लेने का आरोप

Ratna Netam
6 Oct 2026 4:01 PM IST
जल जीवन मिशन पर YSRCP का निशाना सरकार पर क्रेडिट लेने का आरोप
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अमरावती। आंध्र प्रदेश में जल जीवन मिशन को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी YSR कांग्रेस पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। YSRCP ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रोड्डुतुरु में आयोजित हालिया जल जीवन मिशन कार्यक्रम का इस्तेमाल प्रचार हासिल करने, विपक्ष पर हमला करने और पिछली सरकार के कार्यों का श्रेय लेने के लिए किया गया। पार्टी ने इसे मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की ओर से कथित “क्रेडिट चोरी” का उदाहरण बताया।
मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक और YSRCP के कडप्पा जिला प्रभारी रवींद्रनाथ रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रोड्डुतुरु का कार्यक्रम जनहित के मुद्दे से ज्यादा राजनीतिक प्रचार का मंच बन गया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों तक पेयजल पहुंचाने की दिशा में कई काम पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में शुरू किए गए थे, लेकिन मौजूदा गठबंधन सरकार अब उनका श्रेय अपने खाते में जोड़ने की कोशिश कर रही है। यह YSRCP का दावा है, जबकि राज्य सरकार ने कार्यक्रम को जल जीवन मिशन 2.0 के नए चरण की शुरुआत बताया है।
पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। YSRCP का दावा है कि केंद्रीय मंत्री को ऐसा भाष या “स्क्रिप्ट” दिया गया जिसमें तथ्यात्मक गलतियां थीं और उन्होंने उसी के आधार पर बयान दिया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर सुधार किए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि कार्यक्रम के दौरान पेश की गई कुछ जानकारियां सही नहीं थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
रवींद्रनाथ रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार को यदि अपनी उपलब्धियां बतानी हैं तो उसे नए कार्यों और मौजूदा योजनाओं के आधार पर जनता के सामने जाना चाहिए। उनके मुताबिक, पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को नया नाम देकर या पुराने कामों को दोबारा पेश करके राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश उचित नहीं है।
दूसरी ओर, चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने सोमवार को प्रोड्डुतुरु में जल जीवन मिशन 2.0–अमरजीवी जलधारा कार्यक्रम की शुरुआत की। सरकार के मुताबिक इस परियोजना पर लगभग 30,156 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसका उद्देश्य राज्यभर के ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। योजना के तहत 27.36 लाख नए ग्रामीण घरों को नल कनेक्शन देने और पहले से मौजूद 61.60 लाख कनेक्शनों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य है।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि 2024 में गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद केंद्र से जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने के लिए बातचीत की गई और योजना को 2028 तक आगे बढ़ाने की दिशा में काम हुआ। सरकार का दावा है कि उसके कार्यकाल में अब तक हजारों बस्तियों में लाखों परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रोड्डुतुरु के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जल प्रबंधन, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सरकार की प्राथमिकताओं में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के लिए एकीकृत जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण भी मौजूद रहे।
YSRCP ने हालांकि सरकार के इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पूर्ववर्ती सरकार की भूमिका और उसके दौरान किए गए कार्यों का उल्लेख नहीं किया गया। पार्टी का कहना है कि यही वजह है कि वह मौजूदा कार्यक्रम को “क्रेडिट चोरी” के रूप में देख रही है।
रवींद्रनाथ रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोड्डुतुरु की सभा में विपक्ष पर निशाना साधने के लिए राजनीतिक बयानबाजी की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को विकास योजनाओं की समीक्षा करते समय राजनीतिक हमलों से बचना चाहिए और लोगों को सही तथ्य बताने चाहिए।
जल जीवन मिशन मूल रूप से ग्रामीण घरों तक कार्यशील नल कनेक्शन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय योजना है। आंध्र प्रदेश में इसके दूसरे चरण को अमरजीवी जलधारा के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रोड्डुतुरु से शुरू किए गए इस नए चरण में हजारों निर्माण कार्य शामिल हैं और राज्य सरकार इसे ग्रामीण जल सुरक्षा के लिए बड़े अभियान के रूप में पेश कर रही है।
YSRCP का आरोप है कि योजना के बुनियादी कार्य पहले ही पूर्ववर्ती सरकार के समय किए गए थे और मौजूदा सरकार उन उपलब्धियों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। वहीं गठबंधन सरकार का दावा है कि उसने परियोजना को दोबारा गति दी, केंद्र से सहयोग बढ़ाया और बड़े स्तर पर नई परियोजनाओं को मंजूरी दी।
इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। YSRCP का दावा है कि उन्हें गलत जानकारी दी गई थी, जबकि उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में केंद्रीय मंत्री की ओर से इस विशिष्ट आरोप पर कोई अलग विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंध्र प्रदेश की राजनीति में योजनाओं के श्रेय को लेकर सत्तारूढ़ दल और YSRCP के बीच पहले भी विवाद होते रहे हैं। जल जीवन मिशन का मौजूदा मामला उसी राजनीतिक टकराव की नई कड़ी बन गया है। एक तरफ सरकार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नए जल कार्यक्रम को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी ओर YSRCP इसे पूर्ववर्ती सरकार के कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश बता रही है।
अब इस विवाद का केंद्र यह रहेगा कि जल जीवन मिशन के अलग-अलग चरणों में किस सरकार के दौरान कितना काम हुआ और कितने नए कनेक्शन वास्तव में जोड़े गए। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे सामने रख रहे हैं और मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गया है।
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