आंध्र प्रदेश

BC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर YSRCP ने उठाए सवाल

Ratna Netam
5 Oct 2026 7:55 PM IST
BC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर YSRCP ने उठाए सवाल
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राजमुंदरी। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग (BC) को 34 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। YSRCP के पूर्वी गोदावरी जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चेल्लुबोइना वेणुगोपालकृष्ण ने सोमवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम BC समुदाय को गुमराह करने के उद्देश्य से किया जा रहा एक “राजनीतिक नाटक” है। यह YSRCP नेता का आरोप है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि वह 34 प्रतिशत BC आरक्षण को बहाल रखने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
राजमुंदरी स्थित पार्टी कैंप कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए वेणुगोपालकृष्ण ने कहा कि 50 प्रतिशत की कुल आरक्षण सीमा से आगे जाने के लिए कानूनी और आंकड़ों से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिए समर्पित आयोग का गठन किया था, तो उससे जुड़ी रिपोर्ट और आधार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया गया।आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर को स्थानीय निकायों में BC के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सरकारी आदेशों को उस सीमा तक रद्द कर दिया था, जहां SC, ST और BC का कुल वर्टिकल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो रहा था। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक आंकड़े जुटाने की कवायद पूरी करने के बाद इस मुद्दे पर दोबारा विचार कर सकती है।
समर्पित आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
वेणुगोपालकृष्ण ने अपने बयान में समर्पित आयोग की भूमिका को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आयोग ने क्या निष्कर्ष निकाले और आरक्षण की सीमा तय करने के लिए किस तरह के आंकड़ों को आधार बनाया गया।हाई कोर्ट के फैसले में दर्ज विवरण के अनुसार, फरवरी 2026 में एक स्वतंत्र समर्पित आयोग गठित किया गया था। राज्य की ओर से अदालत में कहा गया कि आयोग ने Unified Family Survey से मिले आंकड़ों के अलावा स्वयं भी डेटा संग्रह और फील्ड विजिट की। हालांकि अदालत ने यह भी दर्ज किया कि आयोग की रिपोर्ट को राज्य सरकार ने स्वीकार नहीं किया था और वह विचाराधीन थी।वेणुगोपालकृष्ण ने इसी स्थिति को लेकर सरकार से सवाल किया कि अगर आयोग बनाया गया और उससे रिपोर्ट तैयार कराई गई, तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं रखा गया।
50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा
BC आरक्षण विवाद में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा और स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग के आरक्षण के लिए जरूरी अनुभवजन्य आंकड़ों का है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 34 प्रतिशत BC आरक्षण लागू करने पर SC, ST और BC का कुल वर्टिकल आरक्षण निर्धारित सीमा से अधिक हो रहा था और इसके लिए अपेक्षित अनुभवजन्य आधार उपलब्ध नहीं था।सुप्रीम कोर्ट भी स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण से जुड़े पूर्व फैसलों में समर्पित आयोग द्वारा समकालीन और कठोर अनुभवजन्य जांच की आवश्यकता पर जोर दे चुका है।YSRCP नेता ने इसी कानूनी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पहले से आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं कीं और अब सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची आंध्र सरकार
आंध्र प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) में हाई कोर्ट के 1 अक्टूबर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है। सरकार का तर्क है कि 2026 में नए सिरे से अनुभवजन्य प्रक्रिया की गई थी और उसे पहले की आरक्षण व्यवस्था के समान नहीं माना जाना चाहिए।इससे पहले मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनकी सरकार 34 प्रतिशत BC आरक्षण के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। इस प्रकार YSRCP के आरोपों के विपरीत राज्य सरकार अपनी पहल को पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है।
वेणुगोपालकृष्ण ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में BC समुदाय को 34 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है तो उसे कानूनी जरूरतों को पहले पूरा करना चाहिए था। उन्होंने आरक्षण से जुड़े सरकारी आदेशों और उनके कानूनी आधार को लेकर भी सवाल उठाए।इससे पहले भी YSRCP नेताओं ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को घेरते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में BC उम्मीदवारों को कम से कम 34 प्रतिशत राजनीतिक अवसर देने की मांग की थी। पार्टी नेताओं ने सरकार पर आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर नजर
BC आरक्षण का यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है। हाई कोर्ट ने सरकार के आदेशों को 50 प्रतिशत से अधिक कुल आरक्षण की सीमा तक रद्द किया है, जबकि राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।YSRCP की ओर से आयोग की रिपोर्ट, अनुभवजन्य आंकड़ों और सरकार की रणनीति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं राज्य सरकार का पक्ष है कि उसने नए आंकड़ों और प्रक्रिया के आधार पर 34 प्रतिशत आरक्षण का फैसला किया था।फिलहाल YSRCP नेता की ओर से लगाए गए “राजनीतिक नाटक” और BC समुदाय को धोखा देने जैसे आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों के बीच 34 प्रतिशत BC आरक्षण की कानूनी स्थिति पर आगे की तस्वीर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली कार्यवाही से स्पष्ट होगी।
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