आंध्र प्रदेश

लोकल बॉडी चुनाव से पहले YSRCP ने मांगी सर्वदलीय बैठक

Ratna Netam
7 Oct 2026 8:59 PM IST
लोकल बॉडी चुनाव से पहले YSRCP ने मांगी सर्वदलीय बैठक
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अमरावती। आंध्र प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) से मांग की है कि चुनाव की अधिसूचना जारी करने से पहले सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई जाए। पार्टी का कहना है कि इस बैठक में चुनावी प्रक्रिया, उम्मीदवारों की पात्रता से जुड़े दस्तावेज, वार्ड परिसीमन, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची और आरक्षण जैसे मुद्दों पर स्पष्टता दी जानी चाहिए।
YSRCP के राज्य महासचिव और विधान परिषद सदस्य लेल्ला अप्पी रेड्डी ने राज्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों से पहले कई ऐसे मुद्दे सामने आ रहे हैं, जिनका सीधा असर उम्मीदवारों, मतदाताओं और राजनीतिक दलों पर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पहले इन सभी विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाए और उसके बाद आयोग स्पष्ट तथा एकरूप दिशा-निर्देश जारी करे।
पत्र में जाति और समुदाय प्रमाणपत्र के साथ-साथ नो-ड्यूज़ और NOC सर्टिफिकेट जारी करने में कथित देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। अप्पी रेड्डी ने दावा किया कि राज्य के कई हिस्सों में सर्वर खराब होने के कारण संभावित उम्मीदवारों को जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवारों को ग्राम और वार्ड सचिवालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
YSRCP का कहना है कि चुनावी नामांकन के लिए जरूरी दस्तावेजों में देरी किसी योग्य उम्मीदवार के चुनाव लड़ने के अवसर को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से जिला कलेक्टरों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, राजस्व विभाग, नगर निकायों और पंचायत से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि जरूरी प्रमाणपत्र समयबद्ध और बिना भेदभाव के जारी किए जाएं।
अप्पी रेड्डी ने ग्राम और वार्ड सचिवालय व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। उनका आरोप है कि तकनीकी समस्या का हवाला देकर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। YSRCP ने कहा कि यदि तकनीकी व्यवस्था में समस्या बनी रहती है तो वैकल्पिक या मैनुअल तरीके से भी दस्तावेज जारी करने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि किसी उम्मीदवार का नामांकन प्रभावित न हो।
पार्टी ने वार्डों के परिसीमन को लेकर भी आपत्ति जताई है। YSRCP ने मांग की है कि नगर निकायों में वार्ड सीमाओं को अंतिम रूप देने से पहले पूरे राज्य में उनकी समीक्षा की जाए और जहां जरूरत हो, वहां सुधार किए जाएं। पार्टी का कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर उम्मीदवारों, मतदाताओं और चुनावी प्रतिस्पर्धा पर पड़ता है।
YSRCP ने चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को भी बड़ा मुद्दा बनाया है। पार्टी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की मांग करते हुए आशंका जताई है कि कुछ क्षेत्रों में सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग, राजनीतिक हस्तक्षेप, डराने-धमकाने या दबाव की स्थिति पैदा हो सकती है। ये YSRCP की आशंकाएं और आरोप हैं। इससे पहले भी पार्टी ने SEC के सामने केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग रखी थी, जिस पर आयोग ने उसके प्रतिनिधित्व को राज्य के पुलिस महानिदेशक के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा था।
नगर निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने के मुद्दे पर भी पार्टी ने विशेष मांग रखी है। YSRCP का कहना है कि वार्ड-वार मतदाता सूची तभी तैयार की जाए जब स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR प्रक्रिया पूरी हो जाए और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो जाए। पार्टी ने कहा है कि यह प्रक्रिया लागू न्यायिक निर्देशों के अधीन और स्पष्ट नियमों के अनुसार होनी चाहिए।
सर्वदलीय बैठक में आरक्षण और सीटों के रोटेशन पर भी चर्चा की मांग की गई है। पार्टी चाहती है कि आयोग स्पष्ट करे कि विभिन्न स्थानीय निकायों में सीटों और पदों का आरक्षण किस आधार पर तय किया जाएगा और रोटेशन की प्रक्रिया क्या होगी। इसके अलावा चुनाव कार्यक्रम, अलग-अलग चरणों में मतदान, नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, महापौर और चेयरपर्सन के चुनाव की प्रक्रिया तथा मतदान व्यवस्था पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
YSRCP ने आदर्श आचार संहिता के पालन और सरकारी अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में जिला और स्थानीय प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए अधिकारियों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहकर काम करने के निर्देश पहले से जारी होने चाहिए। मतदान और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा तथा शिकायतों के समयबद्ध निपटारे की व्यवस्था भी सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट की जानी चाहिए।
पार्टी ने यह भी सुझाव दिया है कि सर्वदलीय बैठक का एजेंडा पहले से सभी दलों को भेजा जाए। बैठक में संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाए और चर्चा के बाद राज्य चुनाव आयोग लिखित स्पष्टीकरण तथा समान दिशा-निर्देश जारी करे। YSRCP का कहना है कि ऐसा करने से अलग-अलग जिलों में नियमों की अलग-अलग व्याख्या की गुंजाइश कम होगी और चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर YSRCP ने पिछले कुछ दिनों में अपनी तैयारियां भी तेज की हैं। पार्टी ने अपने कानूनी प्रकोष्ठ को उम्मीदवारों के नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिला स्तर पर कानूनी टीमों को भी सक्रिय रहने को कहा गया है, ताकि दस्तावेज, नामांकन पत्र, हलफनामे और चुनावी आपत्तियों से जुड़े मामलों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
फिलहाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से YSRCP की नई सर्वदलीय बैठक की मांग पर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। पार्टी ने साफ किया है कि स्थानीय निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले प्रक्रिया, दस्तावेज, परिसीमन, सुरक्षा और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर सभी दलों को समान अवसर और स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
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