आंध्र प्रदेश

34प्रतिशत आरक्षण को लेकर चंद्रबाबू नायडू पर YSR कांग्रेस का हमला

Ratna Netam
11 Oct 2026 7:20 PM IST
34प्रतिशत आरक्षण को लेकर चंद्रबाबू नायडू पर YSR कांग्रेस का हमला
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अमरावती। आंध्र प्रदेश में पिछड़ा वर्ग (BC) के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के कार्यकारी अध्यक्ष रमेश गौड ने रविवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछड़ा वर्ग को 34 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा कर रही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई है। गौड ने आरोप लगाया कि सरकार के इस रवैये से पिछड़ा वर्ग के लोगों को उनके अधिकारों के संबंध में गुमराह किया जा रहा है।वाईएसआर कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए रमेश गौड ने आरक्षण से संबंधित सरकारी घोषणाओं और आदेशों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजीव रंजन मिश्रा आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के कुछ ही दिनों बाद सरकार ने आरक्षण को लेकर घोषणा और सरकारी आदेश जारी कर दिया। गौड ने आरोप लगाया कि इस दौरान व्यापक चर्चा और पारदर्शी मंजूरी की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
34 प्रतिशत आरक्षण पर सरकार से सवाल
रमेश गौड ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर पिछड़ा वर्ग को आरक्षण के नाम पर भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक घोषणा कर देने से आरक्षण को कानूनी सुरक्षा नहीं मिल जाती।गौड के अनुसार, पिछड़ा वर्ग के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसे कानूनी आधार प्राप्त हो और जिसका लाभ सभी पात्र उम्मीदवारों को मिल सके।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायडू कानूनी रूप से सुरक्षित आरक्षण सुनिश्चित करने के बजाय राजनीतिक स्तर पर आश्वासन दे रहे हैं।वाईएसआर कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।हालांकि, सरकार की ओर से आरक्षण संबंधी निर्णय के समर्थन में दिए गए विस्तृत कानूनी तर्क उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं हैं।
आयोग की रिपोर्ट के बाद जल्दबाजी में आदेश जारी करने का आरोप
रमेश गौड ने राजीव रंजन मिश्रा आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद जारी सरकारी आदेशों की समयसीमा पर सवाल उठाए।उन्होंने बताया कि आयोग की रिपोर्ट 14 अगस्त को सरकार को सौंपी गई थी। इसके बाद 18 अगस्त को सरकारी घोषणा की गई और 19 अगस्त को सरकारी आदेश (GO) जारी कर दिया गया।गौड ने सवाल किया कि आयोग की रिपोर्ट मिलने के इतने कम समय में आरक्षण से संबंधित फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा किए बिना और पारदर्शी मंजूरी की प्रक्रिया स्पष्ट किए बिना सरकारी घोषणा तथा आदेश जारी कर दिए गए।वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।हालांकि, आयोग की रिपोर्ट की विस्तृत सिफारिशों और सरकारी आदेश की सभी शर्तों का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
कानूनी अड़चनों के बावजूद जश्न मनाने का आरोप
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं को आरक्षण से जुड़ी कानूनी चुनौतियों की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने सरकारी घोषणाओं का जश्न मनाया।पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कानूनी अड़चनों की जानकारी होने के बावजूद टीडीपी नेताओं ने इन घोषणाओं को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया।रमेश गौड ने कहा कि आरक्षण से जुड़े मामलों में कानूनी स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या सामने न आए।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछड़ा वर्ग को कानूनी रूप से सुरक्षित आरक्षण देने के बजाय घोषणाओं पर अधिक ध्यान दिया।हालांकि, इन आरोपों पर टीडीपी या मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की ताजा प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
दो साल की देरी को लेकर नायडू सरकार पर निशाना
रमेश गौड ने आरोप लगाया कि पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू करने में दो साल तक देरी की गई।उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाने के बाद अब मुख्यमंत्री नायडू राजनीतिक स्तर पर आश्वासन दे रहे हैं।गौड ने दावा किया कि सरकार को आरक्षण से जुड़ी कानूनी चुनौतियों का समाधान करना चाहिए था, लेकिन ऐसा करने के बजाय पार्टी स्तर पर आरक्षण देने की बात की जा रही है।उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के अधिकार केवल किसी एक राजनीतिक दल की घोषणा पर निर्भर नहीं होने चाहिए।वाईएसआर कांग्रेस नेता ने कानूनी सुरक्षा को आरक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पार्टी कोटे और कानूनी आरक्षण में बताया अंतर
रमेश गौड ने पार्टी स्तर पर दिए जाने वाले आरक्षण और कानून के तहत निर्धारित आरक्षित सीटों के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की।उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल द्वारा अपने उम्मीदवारों के चयन में निश्चित प्रतिशत भागीदारी देने का आश्वासन केवल उसी पार्टी की आंतरिक व्यवस्था तक सीमित होता है।इसके विपरीत, कानून के तहत आरक्षित सीटों की व्यवस्था सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों पर लागू होती है।गौड के अनुसार, कानूनी रूप से आरक्षित सीटें पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को व्यापक सुरक्षा प्रदान करती हैं।उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के अधिकार किसी एक पार्टी के निर्णय तक सीमित नहीं रहने चाहिए।उनका कहना था कि कानूनी आरक्षण की व्यवस्था होने पर विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार अवसर मिलते हैं।
संविधान संशोधन और नौवीं अनुसूची की मांग
वाईएसआर कांग्रेस नेता रमेश गौड ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से आरक्षण को कानूनी सुरक्षा दिलाने के लिए संवैधानिक स्तर पर पहल करने की मांग की।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के माध्यम से आवश्यक संविधान संशोधन करवाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को संविधान की नौवीं अनुसूची के तहत सुरक्षा दिलाने की मांग भी की।नौवीं अनुसूची संविधान का एक प्रावधान है, जिसमें कुछ कानूनों को विशेष संरक्षण देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, नौवीं अनुसूची में किसी कानून को शामिल करने मात्र से वह हर प्रकार की न्यायिक समीक्षा से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता।सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार, नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों की भी संविधान के मूल ढांचे के आधार पर समीक्षा की जा सकती है।ऐसे में गौड की मांग एक राजनीतिक और कानूनी प्रस्ताव है, जिसके क्रियान्वयन के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होगा।
पिछड़ा वर्ग के अधिकारों पर राजनीतिक बहस
आंध्र प्रदेश में 34 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर वाईएसआर कांग्रेस और सत्तारूढ़ टीडीपी के बीच मतभेद सामने आए हैं।रमेश गौड ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार आरक्षण के मुद्दे पर पिछड़ा वर्ग को पर्याप्त कानूनी सुरक्षा नहीं दे रही है।उन्होंने आयोग की रिपोर्ट, सरकारी घोषणा और आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।वाईएसआर कांग्रेस का कहना है कि पिछड़ा वर्ग को ऐसा आरक्षण मिलना चाहिए, जिसका लाभ सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत प्राप्त हो सके।फिलहाल मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी की ओर से इन ताजा आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।रमेश गौड के बयान के बाद आंध्र प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की कानूनी स्थिति, सरकारी प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
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