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तिरूपति के सांसद ने डीआइजी, दो एसपी को निकाय चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग की

तिरुपति: शहरी स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया के फिर से शुरू होने के बीच, तिरुपति के सांसद मडिला गुरुमूर्ति ने सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा देने और एक डीआईजी (DIG) तथा दो पुलिस अधीक्षकों (SP) को उनके पदों से हटाने को कहा है। सांसद का आरोप है कि इन अधिकारियों के आचरण ने नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
'द हंस इंडिया' से बातचीत में सांसद ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति, राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायाधीश, आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग, केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और केंद्रीय गृह सचिव को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
गुरुमूर्ति ने मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया फिर से शुरू होने पर संवेदनशील इलाकों की निष्पक्ष निगरानी की जाए और किसी भी तरह की धमकी या दबाव की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो उनके खिलाफ सुधारात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिसमें उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटाना भी शामिल है।
ज्ञापन में डीआईजी डॉ. कोया प्रवीण, अन्नामय्या के एसपी धीरज कुनुबिली और कडप्पा के एसपी शेलके नचिकेत विश्वनाथ का नाम लिया गया है। गुरुमूर्ति ने इन पर निष्क्रियता, पक्षपात बरतने और नामांकन के दौरान हिंसा को रोकने में विफल रहने तथा उम्मीदवारों को बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि चुनाव से जुड़ी इनकी ड्यूटी, पोस्टिंग और पर्यवेक्षी जिम्मेदारियों की जांच की जाए।
सांसद ने पुंगनूर में राजमपेट के सांसद पी.वी. मिथुन रेड्डी पर हुए कथित हमले का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) का कोई भी उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल नहीं कर सका। उन्होंने कडप्पा और अन्नामय्या जिलों के पुलिवेंदुला, कमलापुरम, कडप्पा, येर्रागुंटला, राजमपेट, रायचोटी, बडवेल, मैदुकुर और प्रोद्दतूर में नामांकन के दौरान हुई हिंसा, डराने-धमकाने और बाधा डालने की शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की है।
गुरुमूर्ति ने मांग की है कि कमलापुरम, बडवेल, राजमपेट, येर्रागुंटला और पुंगनूर नगर पालिकाओं के नामांकन रिकॉर्ड की जांच की जाए, साथ ही उन शिकायतों की भी पड़ताल हो जिनमें उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कोया प्रवीण द्वारा कथित तौर पर मिथुन रेड्डी के खिलाफ की गई अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियों की भी जांच की मांग की है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। गुरुमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या कोया प्रवीण के तबादले के संबंध में चुनाव आयोग के 9 अप्रैल, 2019 के पत्र और राज्य सरकार के 10 अप्रैल, 2019 के आदेश (GO Rt No 815) इस मामले में लागू होते हैं।
इन घटनाओं और अधिकारियों के आचरण की स्वतंत्र जांच के तहत, सांसद ने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, शिकायतों, एफआईआर, पुलिस तैनाती के रिकॉर्ड और ड्यूटी रोस्टर को सुरक्षित रखा जाए और उनकी जांच की जाए।





