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सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नायडू के बीसी कोटा विश्वासघात को उजागर किया: YSRCP

अमरावती: YSRCP ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों (BC) के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित न कर पाने को लेकर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर हमले तेज़ कर दिए हैं। पार्टी ने कानूनी रूप से मान्य कोटा और आगामी चुनावों में कथित डराने-धमकाने की कोशिशों के खिलाफ सुरक्षा की मांग की है।
पूर्व मंत्री धर्मना प्रसाद राव और चेल्लोबोयिना वेणुगोपाला कृष्णा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सरकार की उस विफलता को उजागर कर दिया है, जिसके तहत उसने अपने चुनावी घोषणापत्र में 34 प्रतिशत आरक्षण का वादा करने के बावजूद कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की।
उन्होंने नायडू पर समय बर्बाद करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि NDA के एक प्रमुख सहयोगी होने के नाते, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर संवैधानिक सुरक्षा के लिए दबाव क्यों नहीं डाला। वेणुगोपाला कृष्णा ने कानूनी आरक्षण के विकल्प के तौर पर पार्टी-स्तर पर सीट बंटवारे को खारिज कर दिया, जबकि धर्मना ने BC से बिना शर्त माफी मांगने और कानूनी रूप से गठित आयोग के माध्यम से एक व्यापक अनुभवजन्य सर्वेक्षण (empirical survey) कराने की मांग की। नेताओं ने Y.S. जगन मोहन रेड्डी सरकार के तहत BC के प्रतिनिधित्व का हवाला दिया, जिसमें राज्यसभा की 11 में से चार सीटें, मेयर के 13 में से नौ पद और नगर पालिका अध्यक्ष के 84 में से 44 पद शामिल हैं। उन्होंने NDA गठबंधन सरकार से आग्रह किया कि वह YSRCP पर दोष मढ़ना बंद करे और कोटा सुनिश्चित न कर पाने के लिए अपनी विफलता का कारण बताए।
अलग से, YSRCP MLC लेल्ला अप्पी रेड्डी ने राज्य चुनाव आयोग से मांग की कि नामांकन से लेकर मतगणना तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को तैनात किया जाए, CCTV निगरानी और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाए, स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएं और जिला मुख्यालयों पर नामांकन के लिए एक सुरक्षित अतिरिक्त सुविधा स्थापित की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि धमकियां, बाधाएं और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
पूर्व सांसद और पार्टी प्रवक्ता गोरंटला माधव ने नायडू पर आरोप लगाया कि उन्होंने अदालती चुनौतियों के जरिए BC आरक्षण को 34 प्रतिशत से घटाकर 24.15 प्रतिशत कर दिया। उन्होंने नायडू के इस दावे को गलत बताया कि उन्होंने 1995 में कोटा लागू किया था; उन्होंने कहा कि संबंधित संशोधन को नायडू के मुख्यमंत्री बनने से पहले N.T. रामाराव के कार्यकाल में मंजूरी दी गई थी। माधव ने NDA सरकार के माध्यम से संसदीय संशोधन और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए आरक्षण प्रतिशत की स्पष्ट घोषणा की मांग की।





