आंध्र प्रदेश

साइकृष्णा केस में CBI जांच पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

Ratna Netam
24 Sept 2026 6:52 PM IST
साइकृष्णा केस में CBI जांच पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
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आंध्र प्रदेश : गाडे साइकृष्णा मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि यदि आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट मामले की CBI जांच का आदेश नहीं देता है तो वह इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित आदेश जारी करने पर विचार कर सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करने का निर्णय लिया है।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में साइकृष्णा मामले से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई हो चुकी है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग भी हाई कोर्ट के समक्ष उठाई गई है।YSR कांग्रेस पार्टी के सेंट्रल ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा करने का फैसला किया। शीर्ष अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि हाई कोर्ट CBI जांच का आदेश नहीं देता है तो सुप्रीम कोर्ट आगे उचित आदेश पारित कर सकता है।
26 अक्टूबर को अगली सुनवाई
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है और अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। इस अवधि के दौरान आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद शीर्ष अदालत CBI जांच की मांग पर आगे विचार कर सकती है।सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि एक NGO से संबंधित मामला आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित है। इन सभी लंबित न्यायिक कार्यवाहियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल CBI जांच का आदेश देने के बजाय हाई कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा करना उचित समझा।
क्या है साइकृष्णा मामला
यह मामला गाडे साइकृष्णा की कथित हिरासत में मौत और उनके शव के लापता होने के आरोपों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका, कथित अवैध हिरासत और सबूत नष्ट किए जाने जैसे आरोपों की जांच की मांग की गई है। ये आरोप अभी न्यायिक जांच और कार्यवाही का विषय हैं।मामले में YSRCP सांसद मद्दिला गुरुमूर्ति ने भी याचिका दाखिल की है। रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
हाई कोर्ट में CBI जांच की मांग
साइकृष्णा की मां गाडे विजयलक्ष्मी ने भी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपने बेटे से संबंधित मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करने के साथ जांच CBI को सौंपने की मांग की थी। सितंबर की शुरुआत में हाई कोर्ट ने CBI जांच की मांग वाली याचिका पर पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।अब हाई कोर्ट ने संबंधित कार्यवाही पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाई कोर्ट के आदेश को सामने आने देने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए थे गंभीर सवाल
इस मामले की एक दिन पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए थे। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने साइकृष्णा को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किए जाने, FIR दर्ज करने में कथित देरी और पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज से जुड़े आरोपों पर चिंता जताई थी।अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड भी तलब किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को संबंधित रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया गया था।इन घटनाक्रमों के कारण साइकृष्णा मामला अब आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट में भी महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यवाही का विषय बन गया है।
CBI को भी बनाया गया पक्षकार
सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े कुछ मामलों में CBI को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश भी दिया है। इसके साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी करने और रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इन जुड़े मामलों को 12 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।हालांकि, CBI को पक्षकार बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि जांच एजेंसी को साइकृष्णा मामले की जांच सौंप दी गई है। CBI जांच पर अंतिम स्थिति आगे के न्यायिक आदेशों से स्पष्ट होगी।
YSRCP ने की निष्पक्ष जांच की मांग
YSRCP इस मामले में लगातार CBI जांच की मांग कर रही है। पार्टी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर कई आरोप लगाए हैं। पार्टी के प्रदेश महासचिव और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पोन्नावोलु सुधाकर रेड्डी ने भी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की है। ये पार्टी के आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और CBI से जांच कराने की मांग की है।
अब हाई कोर्ट के आदेश पर नजर
गुरुवार की सुनवाई के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला होगा। हाई कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होगा कि मामले की जांच मौजूदा एजेंसी के पास रहेगी या इसे CBI को सौंपने का निर्देश दिया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करने का रुख अपनाया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह संभावना खुली रखी है कि यदि हाई कोर्ट CBI जांच का आदेश नहीं देता है तो वह स्वयं हस्तक्षेप कर उचित आदेश जारी कर सकता है।ऐसे में साइकृष्णा मामले में आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला बेहद अहम होगा। इसके बाद 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में CBI जांच की मांग और आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
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