आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश में निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान

Ratna Netam
4 Nov 2026 9:47 PM IST
आंध्र प्रदेश में निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान
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अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, उम्मीदवारों को धमकाने और मतदान तथा मतगणना के दौरान पक्षपात के आरोप लगाते हुए आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वे कानूनी विकल्प अपनाएंगे।वाईएसआरसीपी ने राज्य निर्वाचन आयोग को कुल 16 शिकायतें सौंपकर चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है। पार्टी का आरोप है कि कई स्थानों पर चुनाव अधिकारियों ने शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में विपक्षी उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों को चुनाव संबंधी गतिविधियों में बाधाओं का सामना करना पड़ा।पार्टी ने चुनाव आयोग से संबंधित मामलों की स्वतंत्र जांच कराने, जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और पक्षपात के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारियों से हटाने की मांग की है।
वाईएसआरसीपी का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल और उम्मीदवार को समान अवसर मिलना चाहिए। किसी भी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने, चुनाव प्रचार करने या मतदान केंद्र पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त करने से रोकना निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के विपरीत है।पार्टी नेताओं के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनाव आम नागरिकों की समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं। नगरपालिकाओं और पंचायत स्तर पर चुने गए प्रतिनिधि स्थानीय विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। इसलिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर पार्टी के अधिकृत एजेंटों को प्रवेश नहीं दिया गया। पार्टी ने तिरुपति जिले के पेल्लाकुर मंडल के मतदान केंद्रों पर आधिकारिक रूप से नियुक्त एजेंटों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है।इसके अलावा चित्तूर जिले के पलामनेर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाई गई है। पार्टी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती, शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।
वाईएसआरसीपी का कहना है कि इन उपायों से मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और मतदाताओं तथा उम्मीदवारों का विश्वास मजबूत होगा।पार्टी ने मतगणना के दौरान भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। कुप्पम नगरपालिका में वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों और मतगणना एजेंटों को कथित रूप से बाहर निकाले जाने का मामला उठाया गया है।इसी तरह अनंतपुर जिले की कल्याणदुर्ग नगरपालिका में पुनर्मतगणना की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का आरोप है कि वहां केवल उन वार्डों में पुनर्मतगणना की अनुमति दी गई, जहां वाईएसआरसीपी ने जीत दर्ज की थी।प्रकाशम जिले के चिमाकुर्थी मतगणना केंद्र पर भी पार्टी ने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेताओं और समर्थकों पर अपने मतगणना एजेंटों के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है।वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों के बावजूद पर्याप्त कदम नहीं उठाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण है।पार्टी ने आत्मकुर नगरपालिका के वार्ड क्रमांक 26 और 27 में मतों की दोबारा गिनती कराने की मांग भी की है। वाईएसआरसीपी का कहना है कि पुनर्मतगणना के दौरान कथित अनियमितताएं सामने आई थीं और कुछ अनधिकृत व्यक्तियों के मतगणना कक्ष में प्रवेश करने की शिकायत भी की गई थी।
इस मामले में पार्टी ने स्वतंत्र टीम की निगरानी में दोबारा मतगणना कराने का आग्रह किया है।वाईएसआरसीपी ने पूर्व में हुए पुलिवेंदुला जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव का भी उल्लेख किया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका निष्पक्ष नहीं थी।इन शिकायतों के माध्यम से पार्टी ने चुनाव आयोग से कहा है कि मतदान और मतगणना की प्रक्रिया सभी राजनीतिक दलों के लिए समान नियमों के आधार पर संचालित होनी चाहिए।दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने शिकायतों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने अधिकारियों से शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने को कहा है।जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को 4 नवंबर की शाम चार बजे तक कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि आयोग ने शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर जवाब मांगा है।
इस बीच स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। वाईएसआरसीपी ने पहले न्यायालय में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है और उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायतों की जांच करने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा था।न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को भी सुरक्षा की मांग करने वाले उम्मीदवारों को उचित संरक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित शिकायतों के समाधान और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।वाईएसआरसीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।जगन मोहन रेड्डी ने पुलिवेंदुला में मतदान संबंधी शिकायतों को लेकर निष्पक्ष जांच और दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि जहां मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर नहीं मिला, वहां उचित सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
हालांकि, सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। चुनाव संबंधी शिकायतों की वास्तविक स्थिति आयोग की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बढ़ता विवाद राज्य की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरे मतभेद को दर्शाता है। दोनों दलों के लिए ये चुनाव स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव और जनसमर्थन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।ऐसे में चुनाव आयोग के सामने पारदर्शिता बनाए रखने और सभी दलों को समान अवसर प्रदान करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।फिलहाल वाईएसआरसीपी अपनी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का समाधान नहीं किया गया, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने सहित अन्य कानूनी कदम उठा सकती है।अब सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई और शिकायतों पर आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है। आयोग के निर्णय यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि विवादित क्षेत्रों में आगे की चुनावी प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होगी।
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