आंध्र प्रदेश

सचिवालय सिस्टम पर सियासी घमासान YSRCP ने सरकार पर साधा निशाना

Ratna Netam
29 Sept 2026 3:25 PM IST
सचिवालय सिस्टम पर सियासी घमासान YSRCP ने सरकार पर साधा निशाना
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अमरावती। आंध्र प्रदेश में विलेज और वार्ड सचिवालय व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। YSRCP यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक जक्कम्पूडी राजा ने आरोप लगाया है कि चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार उस विलेज और वार्ड सचिवालय सिस्टम को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर रही है, जिसे पिछली YSRCP सरकार ने स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाएं पहुंचाने के लिए शुरू किया था।
जक्कम्पूडी राजा ने कहा कि सचिवालय व्यवस्था को लेकर मौजूदा सरकार की नीतियां कर्मचारियों में असुरक्षा पैदा कर रही हैं। उनका आरोप है कि सरकार पहले वॉलंटियर सिस्टम को कमजोर कर चुकी है और अब विलेज तथा वार्ड सचिवालय कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी तरह के आरोप पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी हाल में लगा चुके हैं। जगन ने दावा किया था कि उनकी सरकार के दौरान सचिवालय व्यवस्था के जरिए सैकड़ों सरकारी सेवाएं स्थानीय स्तर तक पहुंचाई जाती थीं।
राजा ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर चुनावी वादे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान वॉलंटियर्स का मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने का वादा किया गया था। उनके अनुसार इस वादे के जरिए वॉलंटियर्स का समर्थन हासिल किया गया, लेकिन सत्ता में आने के बाद वॉलंटियर सिस्टम को ही प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया गया। राजा इससे पहले भी सरकार पर वॉलंटियर्स से जुड़े चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगा चुके हैं।
YSRCP नेता ने कहा, “वॉलंटियर्स के बाद अब सचिवालय कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।” उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार को उन व्यवस्थाओं से परेशानी है, जिनकी पहचान पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल से जुड़ी हुई है।उन्होंने इस संबंध में आरोग्यश्री योजना का भी उदाहरण दिया। राजा ने कहा कि किसी योजना या व्यवस्था का नाम बदल देने से लोगों की स्मृति में उससे जुड़ी पहचान खत्म नहीं होती। उनके मुताबिक जिस तरह आरोग्यश्री का नाम बदलने के बावजूद लोग इसे पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी से जोड़ते हैं, उसी तरह विलेज और वार्ड सचिवालय व्यवस्था को भी लोग जगन मोहन रेड्डी सरकार की प्रमुख प्रशासनिक पहलों में देखते हैं।
विलेज और वार्ड सचिवालय कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा इन दिनों आंध्र प्रदेश की राजनीति में चर्चा में है। हाल में विजयवाड़ा में सचिवालय कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर “चलो विजयवाड़ा” प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों ने वेतनमान, पदोन्नति और सेवा से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाई। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर YSRCP ने सरकार की आलोचना की थी।YSRCP ने आरोप लगाया है कि सचिवालय व्यवस्था में कर्मचारियों की संख्या कम करने और काम के पुनर्गठन के नाम पर हजारों पद प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी नेताओं ने इसे व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश बताया है। जगन मोहन रेड्डी ने भी आरोप लगाया था कि रेशनलाइजेशन के नाम पर करीब 30 हजार स्थायी सचिवालय पदों पर असर पड़ सकता है। यह YSRCP का दावा है।
दूसरी ओर आंध्र प्रदेश सरकार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। सामाजिक कल्याण और सचिवालय मंत्री डोला श्री बाला वीरांजनेय स्वामी ने कहा है कि गठबंधन सरकार सचिवालय कर्मचारियों के कल्याण और उनकी सेवा संबंधी मांगों से समझौता नहीं करेगी। सरकार के अनुसार करीब 14 हजार सचिवालय कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा चुकी है और बाकी पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।राज्य सरकार का कहना है कि सचिवालय कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई गई है और व्यावहारिक मांगों पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने यह भी दावा किया है कि कर्मचारियों की कार्य स्थितियों और पदोन्नति से जुड़े कदम व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे हैं, न कि उसे समाप्त करने के लिए।
ऐसे में विलेज और वार्ड सचिवालय व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस के दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। YSRCP का कहना है कि सरकार पिछली व्यवस्था को खत्म या कमजोर कर रही है, जबकि गठबंधन सरकार का दावा है कि वह कर्मचारियों की पदोन्नति और प्रशासनिक पुनर्गठन के जरिए व्यवस्था में सुधार कर रही है।जक्कम्पूडी राजा ने कहा कि सचिवालय और वॉलंटियर व्यवस्था स्थानीय स्तर पर लोगों को सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी। उनका आरोप है कि राजनीतिक कारणों से इन व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा रहा है और इसका असर कर्मचारियों के साथ आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ सकता है।फिलहाल सचिवालय कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा राज्य की राजनीति में लगातार गरमाया हुआ है। YSRCP जहां इसे पूर्व सरकार की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश बता रही है, वहीं गठबंधन सरकार कर्मचारियों के हित में सुधार और पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कह रही है। आने वाले दिनों में कर्मचारियों की मांगों पर सरकार के फैसले से इस विवाद की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
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