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चित्तूर में प्रति माह 400 से अधिक किशोर गर्भधारण चिंता का विषय: कलेक्टर सुमित कुमार

चित्तूर: ज़िला कलेक्टर सुमित कुमार ने कहा कि चित्तूर ज़िले में हर महीने किशोरियों के गर्भवती होने के 400 से ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे आपस में तालमेल बिठाकर काम करें और बाल विवाह व किशोरियों के गर्भवती होने की घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाएं।
बुधवार को 'पोषण माह-2026' के मौके पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि बाल विवाह और किशोरियों के गर्भवती होने की घटनाएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इनका लड़कियों की सेहत, पोषण, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे कानून के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों को समझें और ऐसे मामलों को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करें।
कमज़ोर या संवेदनशील इलाकों पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए, जिनमें कुप्पम, कुछ वन क्षेत्र वाले गांव, पलमनेर, पेड्डापंजनी, पलासमुद्रम और ज़िले की सीमा से लगे गांव शामिल हैं। गांव के स्तर पर आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर, एएनएम (ANM) और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संभावित बाल विवाह की जानकारी तुरंत अधिकारियों को देनी चाहिए। उन्होंने राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, ICDS, DRDA-DWCRA और पुलिस विभागों के बीच तालमेल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
कलेक्टर ने बाल विवाह और किशोरियों के गर्भवती होने के मुद्दों पर तीन महीने के विशेष जागरूकता अभियान की घोषणा की। अभियान के दौरान, हर स्वयं सहायता समूह की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। लड़कियों और माता-पिता को किशोर अवस्था में गर्भवती होने से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और बाल विवाह के कानूनी नतीजों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
सुमित कुमार ने कहा कि गरीबी, जागरूकता की कमी, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण, कानूनी कार्रवाई का कम डर और ज़मीनी स्तर पर कमज़ोर निगरानी इस समस्या के कुछ कारण हैं। ज़मीनी स्तर के अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों की पहचान करनी चाहिए और नियमित रिपोर्ट देनी चाहिए।
स्थानीय विधायक गुराजला जगन मोहन ने कहा कि परिवारों को पौष्टिक भोजन को ज़्यादा महत्व देना चाहिए और अपनी रोज़ाना की डाइट में सब्ज़ियां, पत्तेदार सब्ज़ियां, फल, मोटे अनाज (मिलेट्स), दालें और प्रोटीन से भरपूर अन्य चीज़ें शामिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस मौके पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए 'सीमंतम' और 'अन्नप्राशन' कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।





