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आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को आवंटन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश

विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र, राज्य सरकार और अन्य प्राधिकारियों को आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के लिए उपयुक्त लौह अयस्क ब्लॉकों के आवंटन की मांग करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
स्टील प्लांट कर्मचारी संघ के महासचिव जे. अयोध्या रामू द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें सरकारों को संयंत्र के लिए कैप्टिव लौह अयस्क खदानों के आवंटन पर एक निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश लिसा गिल और न्यायमूर्ति चल्ला गुणरंजन की खंडपीठ ने केंद्र, राज्य सरकार, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट प्रबंधन और आंध्र प्रदेश खनिज विकास निगम (एपीएमडीसी) के प्रबंध निदेशकों को नोटिस जारी किए। उत्तरदाताओं को विस्तृत काउंटर दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ए. सत्यप्रसाद ने कहा कि कैप्टिव खदानों की अनुपस्थिति के कारण स्टील प्लांट को लौह अयस्क खरीदने पर भारी खर्च करना पड़ रहा है।
काउंटर दाखिल करने में विफल रहने पर सरकार पर जुर्माना लगाया गया
एपी उच्च न्यायालय ने बुधवार को नेल्लोर जिले में एक बहु-उत्पाद विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) की स्थापना के लिए कृष्णापटनम इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (केआईपीएल) को आवंटित भूमि में कथित अनियमितताओं से संबंधित जनहित याचिका (पीआईएल) में लगभग एक साल तक अपना जवाब दाखिल करने में विफल रहने के लिए राज्य सरकार पर 7,000 रुपये का जुर्माना लगाया।





