आंध्र प्रदेश

विशाखापत्तनम डेटा सेंटर पर नारा लोकेश का बयान, बोले पानी की कमी नहीं होगी

Kavita2
19 Aug 2026 2:29 PM IST
विशाखापत्तनम डेटा सेंटर पर नारा लोकेश का बयान, बोले पानी की कमी नहीं होगी
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अमरावती। आंध्र प्रदेश के शिक्षा और आईटी मंत्री नारा लोकेश ने विशाखापत्तनम में प्रस्तावित डेटा सेंटरों को लेकर विधानसभा में उठे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटरों में पानी की खपत को लेकर कई तरह की गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेटा सेंटरों के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी शहर के आम लोगों की जरूरतों को प्रभावित नहीं करेगा।

मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था के दौर में डेटा सेंटरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है और डेटा सेंटर इस दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं।

विधानसभा में सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि विशाखापत्तनम में विकसित किए जा रहे डेटा सेंटर इको-सिस्टम की क्षमता करीब 6.5 गीगावाट (GW) होगी। इसके लिए अनुमानित रूप से हर साल करीब 3 टीएमसी (TMC) पानी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह पानी शहर के घरेलू उपयोग के लिए निर्धारित हिस्से से नहीं लिया जाएगा।

नारा लोकेश ने बताया कि डेटा सेंटरों में नई तकनीकों का इस्तेमाल कर पानी की खपत को काफी कम किया जा सकता है। आधुनिक कूलिंग सिस्टम और बेहतर प्रबंधन तकनीकों की मदद से डेटा सेंटरों को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से बदल रहा है और पानी बचाने वाली तकनीकों को अपनाया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक पानी पोलावरम परियोजना के तहत निर्धारित औद्योगिक कोटे से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने विधानसभा सदस्यों को आश्वासन दिया कि विशाखापत्तनम शहर के लोगों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले पेयजल को किसी भी स्थिति में डेटा सेंटरों की ओर नहीं मोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार जनता की पेयजल जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। औद्योगिक विकास और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से डेटा सेंटरों के लिए अलग जल आपूर्ति व्यवस्था विकसित की जाएगी।

नारा लोकेश ने यह भी घोषणा की कि पोलावरम परियोजना से ग्रेविटी के माध्यम से विशाखापत्तनम तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 18 महीनों के भीतर शहर तक पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए डेटा सेंटरों तक पानी पहुंचाने के लिए अलग पाइपलाइन व्यवस्था विकसित की जाएगी।

मंत्री ने डेटा सेंटरों के पानी उपयोग की तुलना थर्मल पावर प्लांट से करते हुए कहा कि एक डेटा सेंटर के लिए आवश्यक पानी, 1 गीगावाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट की तुलना में केवल दसवां हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटरों को लेकर जो चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, उनमें कई बातें वास्तविकता से अलग हैं।

उन्होंने कहा कि Google जैसी बड़ी तकनीकी कंपनी की मौजूदगी ने विशाखापत्तनम को आईटी क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। Google के आने से अन्य आईटी कंपनियां भी शहर में निवेश और अपना आधार बनाने के लिए आकर्षित हो रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य विशाखापत्तनम को एक प्रमुख तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि तकनीकी विकास से राज्य में निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

डेटा सेंटरों को लेकर उठी चिंताओं के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ आम जनता की जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। नारा लोकेश के बयान के बाद इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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