आंध्र प्रदेश

स्कूल में छात्रा पर हमले के बाद नारा लोकेश का बड़ा फैसला, 20 काउंसलर तैनात

Kavita2
1 Nov 2026 10:31 AM IST
स्कूल में छात्रा पर हमले के बाद नारा लोकेश का बड़ा फैसला, 20 काउंसलर तैनात
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अनंतपुर। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के राप्थाडु स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में कक्षा के अंदर हुए हिंसक हमले के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित विद्यार्थियों और उनके परिवारों को मानसिक और भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराने की पहल की है। राज्य के मानव संसाधन विकास एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को एक विशेष 'ट्रॉमा-रिस्पॉन्स' कार्यक्रम की घोषणा की। इसके तहत 20 मानसिक स्वास्थ्य सलाहकारों की टीम तैनात की गई है, जो घटना से प्रभावित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रदान करेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पैदा हुए भय और असुरक्षा की भावना को कम करना तथा स्कूल के प्रति उनका विश्वास दोबारा मजबूत करना है।

शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए इस विशेष अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कक्षा 10-A के सभी 32 विद्यार्थियों को काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा कक्षा आठवीं, नौवीं और दसवीं की छात्राओं के घरों पर भी मानसिक स्वास्थ्य सलाहकारों की टीम पहुंचेगी। इस दौरान विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से बातचीत की जाएगी।

राप्थाडु स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में हाल ही में एक छात्रा पर कक्षा के भीतर कथित तौर पर आरी से हमला किए जाने की घटना सामने आई थी। इस घटना ने स्कूल के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। घायल छात्रा का बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में उपचार चल रहा है। रविवार को शिक्षा मंत्री ने बताया था कि छात्रा की हालत स्थिर है और चिकित्सकों ने रक्तस्राव को नियंत्रित कर लिया है।

इस घटना के बाद सरकार ने केवल घायल छात्रा के उपचार तक सहायता सीमित नहीं रखी है, बल्कि हिंसक घटना से प्रभावित अन्य विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देने का निर्णय लिया है। स्कूल में किसी गंभीर हिंसक घटना के प्रत्यक्षदर्शी बनने या उसके बारे में जानकारी मिलने से बच्चों में डर, तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है।

शिक्षा मंत्री की ओर से घोषित ट्रॉमा-रिस्पॉन्स पहल इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। इस कार्यक्रम में शामिल 20 मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार विद्यार्थियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे। उनका उद्देश्य बच्चों की भावनाओं को समझना, उनकी चिंताओं को सुनना और आवश्यकता के अनुसार परामर्श उपलब्ध कराना है।

कक्षा 10-A के सभी 32 विद्यार्थियों को इस पहल में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त कक्षा आठवीं, नौवीं और दसवीं की छात्राओं तक भी सहायता पहुंचाने की योजना है। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस घटना के प्रभाव को केवल एक कक्षा तक सीमित मानकर नहीं चल रही है, बल्कि स्कूल के अन्य विद्यार्थियों की भावनात्मक सुरक्षा को भी महत्व दे रही है।

विशेष टीम के सदस्यों द्वारा घर-घर जाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों से मुलाकात करने की योजना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार बच्चे स्कूल परिसर में अपनी भावनाओं और आशंकाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। घर के परिचित वातावरण में परामर्श मिलने से उन्हें अपनी बात रखने में अधिक सहजता महसूस हो सकती है।

अभिभावकों के लिए भी यह पहल महत्वपूर्ण है। किसी स्कूल में हिंसक घटना होने के बाद माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में परिवारों को सही जानकारी, भावनात्मक सहयोग और बच्चों के व्यवहार में आने वाले संभावित बदलावों के बारे में मार्गदर्शन देना उपयोगी हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भयावह घटना के बाद बच्चों में तनाव के अलग-अलग संकेत दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चों को स्कूल जाने से डर लग सकता है, जबकि कुछ में नींद की परेशानी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन या पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, हर बच्चे की प्रतिक्रिया अलग होती है और किसी भी विद्यार्थी के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में निष्कर्ष प्रशिक्षित विशेषज्ञ के आकलन के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

ट्रॉमा-रिस्पॉन्स कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया जाएगा कि उनकी भावनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। साथ ही उन्हें सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई जारी रखने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह की पहल में बच्चों की बात ध्यानपूर्वक सुनना और उन्हें बिना किसी दबाव के अपनी चिंताएं व्यक्त करने का अवसर देना महत्वपूर्ण होता है।

शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने विद्यार्थियों और उनके परिवारों का आत्मविश्वास बहाल करने को इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य बताया है। सरकार की ओर से तैनात विशेष टीम बच्चों को भावनात्मक सदमे से उबरने में सहायता प्रदान करेगी। इसके साथ ही अभिभावकों को भी यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया जाएगा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था केवल भवन, प्रवेश द्वार या निगरानी तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। किसी हिंसक घटना के बाद स्कूल प्रशासन, शिक्षकों, अभिभावकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में संकट की स्थिति से निपटने की तैयारियों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसी परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता के साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराना विद्यार्थियों की समग्र सुरक्षा का हिस्सा है। बच्चों को सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों में लौटने के लिए पर्याप्त समय और सहयोग मिलना भी आवश्यक है।

कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के लिए यह समय शैक्षणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान किसी हिंसक घटना से उत्पन्न तनाव उनकी पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में उचित परामर्श और शिक्षकों का सहयोग विद्यार्थियों को अपनी नियमित दिनचर्या में लौटने में मदद कर सकता है।

हालांकि, इस विशेष काउंसलिंग अभियान की अवधि, सलाहकारों की योग्यता, अनुवर्ती परामर्श की व्यवस्था और स्कूल में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के संबंध में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इन पहलुओं पर शिक्षा विभाग की आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल आंध्र प्रदेश सरकार ने राप्थाडु स्कूल की घटना के बाद प्रभावित विद्यार्थियों और परिवारों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 20 काउंसलरों की विशेष टीम तैनात करने की घोषणा की है। यह टीम कक्षा 10-A के सभी 32 विद्यार्थियों और अन्य चयनित कक्षाओं की छात्राओं के घर जाकर परामर्श उपलब्ध कराएगी। सरकार की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को भय और भावनात्मक सदमे से उबरने में सहायता देना तथा स्कूल के प्रति उनका विश्वास दोबारा मजबूत करना है।

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