आंध्र प्रदेश

स्थानीय निकायों में BC कोटा पर आगे बढ़ने से कुल आरक्षण की सीमा 50% हो गई है

Tulsi Rao
11 Oct 2026 12:14 PM IST
स्थानीय निकायों में BC कोटा पर आगे बढ़ने से कुल आरक्षण की सीमा 50% हो गई है
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अमरावती: आंध्र प्रदेश सरकार ने शनिवार को ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों (BC) के लिए आरक्षण पर राजीव रंजन मिश्रा आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने का आदेश जारी किया। इसमें यह शर्त रखी गई है कि किसी भी स्थानीय निकाय में BC, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने 10 अक्टूबर को GO Ms नंबर 17 जारी किया। यह आदेश आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के 1 अक्टूबर के फैसले (WP (PIL) नंबर 194/2026) और सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के फैसले (SLP (C) नंबर 35539/2026) के बाद जारी किया गया।

सरकार ने स्थानीय निकायों में BC आरक्षण तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की 'ट्रिपल-टेस्ट' (तीन-स्तरीय जांच) की शर्तों को पूरा करने के मकसद से राजीव रंजन मिश्रा की अध्यक्षता में एक खास आयोग बनाया था (19 फरवरी 2026 के GO Ms नंबर 3 के ज़रिए)। आयोग को स्थानीय शासन के संदर्भ में BC के पिछड़ेपन की प्रकृति और स्तर की गहन जांच करने और अलग-अलग ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए आरक्षण का अनुपात तय करने का काम सौंपा गया था।

सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपने से पहले आयोग ने कई मौजूदा और संबंधित स्रोतों का इस्तेमाल किया। इनमें यूनिफाइड फैमिली सर्वे, सोशल गवर्नेंस एंड सोशल वेलफेयर (SGSW) विभाग का डेटा, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे, अलग-अलग आयोगों की रिपोर्ट, विभागीय रिकॉर्ड और जनगणना के आंकड़े शामिल थे।

आदेश में कहा गया है कि SC और ST के लिए आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 243D और 243T के अनुसार होना चाहिए, जो पंचायतों और नगर पालिकाओं में आरक्षण को नियंत्रित करते हैं। उनकी आबादी के आधार पर तय कोटा, जनगणना के हालिया प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार आबादी की संवैधानिक परिभाषा का पालन करना चाहिए। चूंकि BC के लिए जनगणना का आबादी डेटा उपलब्ध नहीं है, इसलिए सरकार ने अलग-अलग स्थानीय निकायों में BC आरक्षण तय करने के आधार के तौर पर यूनिफाइड फैमिली सर्वे और SGSW रिकॉर्ड से मिले डेटा (अनुभव-आधारित और मौजूदा डेटा) के आयोग के इस्तेमाल को स्वीकार कर लिया है।

पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग तथा नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे संवैधानिक प्रावधानों, अदालती फैसलों और अन्य संबंधित कानूनों के अनुसार इन सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई करें। सरकार ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर लोकतंत्र को मज़बूत करने और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में BC (पिछड़े वर्गों) का उचित प्रतिनिधित्व ज़रूरी है।

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