- Home
- /
- राज्य
- /
- आंध्र प्रदेश
- /
- तारापीठ के होटल में...
तारापीठ के होटल में भीषण आग, सात तीर्थयात्रियों की मौत; कई घायल

बीरभूम। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तारापीठ में सोमवार तड़के एक होटल में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा कर दिया। चार मंजिला होटल में आग लगने से कम से कम सात तीर्थयात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के समय होटल में ठहरे ज्यादातर यात्री सो रहे थे। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे लगी। तारापीठ मंदिर क्षेत्र में स्थित चार मंजिला होटल के ग्राउंड फ्लोर पर सबसे पहले आग लगने की बात सामने आई है। उस समय होटल में ठहरे अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। अचानक आग और धुएं के कारण होटल के अंदर अफरा-तफरी मच गई।
तारापीठ पश्चिम बंगाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां तारा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर के आसपास बने होटलों और लॉज में ठहरते हैं। हादसे के समय भी होटल में कई तीर्थयात्री मौजूद थे।
आग तेजी से फैलने और धुआं भरने के कारण होटल में मौजूद लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग भी मदद के लिए पहुंचे। इसके बाद दमकल विभाग को सूचना दी गई और अग्निशमन कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के साथ अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।
दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान होटल के अंदर से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में कम से कम सात तीर्थयात्रियों की जान जाने की जानकारी सामने आई है। कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल अस्पताल भेजा गया।
घायलों को रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों का इलाज कर रही है। कुछ लोगों को आग से झुलसने और कुछ को धुएं के कारण परेशानी होने की आशंका है। गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
हादसे के बाद होटल और आसपास के इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। राहत-बचाव अभियान के दौरान होटल के अलग-अलग हिस्सों की तलाशी ली गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो।
घटना सुबह के समय होने के कारण नुकसान ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकतर मेहमान सो रहे थे और उन्हें आग लगने की जानकारी मिलने में समय लगा होगा। आग के साथ उठे घने धुएं ने भी लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल बनाया।
हादसे के बाद अब आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट, किसी उपकरण में खराबी या किसी अन्य कारण से लगी। संबंधित विभागों की जांच के बाद ही इसकी सही वजह सामने आ सकेगी।
इसके साथ होटल में मौजूद अग्नि सुरक्षा इंतजाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। चार मंजिला इमारत में आग लगने के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत ने आपातकालीन निकास, फायर अलार्म, अग्निशामक उपकरण और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि होटल के पास आवश्यक फायर सेफ्टी मंजूरी थी या नहीं और वहां मौजूद अग्निशमन उपकरण काम करने की स्थिति में थे या नहीं। होटल में प्रवेश और बाहर निकलने के कितने रास्ते थे तथा आग लगने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने की क्या व्यवस्था थी, ये पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे।
तारापीठ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर पूरे साल श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां भीड़ काफी बढ़ जाती है। ऐसे स्थानों पर होटल और लॉज में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी संख्या में लोगों की जान को खतरे में डाल सकती है।
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने मृतकों की पहचान सुनिश्चित करना और उनके परिजनों को सूचना देना भी बड़ी जिम्मेदारी है। अलग-अलग स्थानों से आए तीर्थयात्रियों के होटल में ठहरने के कारण प्रशासन को रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी जुटानी पड़ सकती है।
वहीं अस्पताल में भर्ती घायलों के परिजनों से संपर्क करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है। प्रशासन की ओर से घायलों के उपचार और मृतकों से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस घटना ने धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर स्थित होटलों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। बड़ी संख्या में यात्रियों को ठहराने वाले प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम होना जरूरी है। फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशामक यंत्र और सुरक्षित निकास जैसी सुविधाएं किसी आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
खास तौर पर बहुमंजिला होटलों में आपातकालीन निकास मार्ग स्पष्ट और अवरोध मुक्त होना जरूरी है। होटल कर्मचारियों को भी आग लगने जैसी स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि दमकल विभाग के पहुंचने से पहले लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा सके।
तारापीठ में हुए इस हादसे के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की मांग उठ सकती है। प्रशासन के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि क्या निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
फिलहाल दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया है और राहत-बचाव कार्य के बाद घटना से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है। सात तीर्थयात्रियों की मौत से तारापीठ में शोक का माहौल है। घायलों का रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उपचार जारी है। आग लगने के कारण और होटल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।





