आंध्र प्रदेश

आंध्र यूनिवर्सिटी के शताब्दी वर्ष पर ग्लोबल साझेदारी, तीन बड़े MoU साइन

Harrison
27 April 2026 10:16 PM IST
आंध्र यूनिवर्सिटी के शताब्दी वर्ष पर ग्लोबल साझेदारी, तीन बड़े MoU साइन
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Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम में आंध्र यूनिवर्सिटी ने अपने 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शताब्दी समारोह को वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के बड़े विस्तार के साथ मनाया। इस दौरान यूनिवर्सिटी ने रिसर्च, टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
Andhra University ने इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी कर अपने शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचे को नई दिशा देने की पहल की है।
पहला समझौता अमेरिका की University of Florida के साथ किया गया है, जिसके तहत दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक और शोध आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। इस साझेदारी का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर अवसर उपलब्ध कराना है।
दूसरा महत्वपूर्ण समझौता ऑक्समिक लैब्स इंक. के साथ हुआ है, जिसके तहत 400 करोड़ रुपये के निवेश से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम्स में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र आधुनिक तकनीक, डेटा साइंस और AI रिसर्च को बढ़ावा देगा।
तीसरा समझौता भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के साथ किया गया है, जिसके तहत 180 करोड़ रुपये की लागत से मौसम संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। यह सहयोग जलवायु अध्ययन, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने में मदद करेगा।
इन सभी समझौतों का उद्देश्य आंध्र यूनिवर्सिटी को वैश्विक शोध केंद्र के रूप में विकसित करना और आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह साझेदारियां आने वाले वर्षों में अनुसंधान और नवाचार के नए अवसर पैदा करेंगी।
शताब्दी समारोह के दौरान विश्वविद्यालय ने अपनी उपलब्धियों और पिछले 100 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा को भी याद किया। इस अवसर पर शिक्षकों, छात्रों और शोधकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की।
विश्वविद्यालय अधिकारियों ने कहा कि इन समझौतों से न केवल शोध क्षमता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और काम करने के अवसर भी मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI और मौसम विज्ञान जैसे क्षेत्रों में इस तरह के निवेश भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करेंगे। साथ ही यह वैश्विक सहयोग को भी नई दिशा देगा।
फिलहाल इन समझौतों के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर रिसर्च प्रोजेक्ट्स और तकनीकी विकास की शुरुआत की उम्मीद की जा रही है।
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