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चक्रवात 'मुरासु' के बीच कर्नाटक ने बढ़ाया मदद का हाथ, CM चंद्रबाबू नायडू ने जताया आभार

अमरावती। आंध्र प्रदेश में भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के असर के बीच पड़ोसी राज्य कर्नाटक ने मदद का हाथ बढ़ाया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार, 3 नवंबर को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और वहां की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के इस कठिन समय में कर्नाटक की ओर से मिला सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर उपलब्ध कराई जा रही सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्बहाली के कार्यों को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कर्नाटक सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि चक्रवात के दौरान आंध्र प्रदेश के साथ खड़े रहने के लिए वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री और वहां के लोगों के प्रति हृदय से आभारी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि संकट की इस घड़ी में मिला सहयोग हमेशा याद रखा जाएगा।
दरअसल, आंध्र प्रदेश को पिछले कुछ दिनों में लगातार दो चक्रवाती तूफानों की चुनौती का सामना करना पड़ा है। पहले चक्रवात 'अर्नब' ने राज्य के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद चक्रवात 'मुरासु' के पहुंचने से प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ गईं। ऐसी स्थिति में प्रभावित इलाकों में बिजली व्यवस्था बहाल करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कर्नाटक सरकार ने आंध्र प्रदेश में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए 500 प्रशिक्षित बिजली कर्मचारियों को आवश्यक उपकरणों के साथ भेजने का निर्णय लिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि उन्होंने चंद्रबाबू नायडू से बातचीत की और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
शिवकुमार के अनुसार, चक्रवात 'अर्नब' के कारण आंध्र प्रदेश में 15 हजार से अधिक बिजली के खंभे उखड़ गए थे। इससे कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई। बिजली के खंभों और लाइनों की मरम्मत के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारियों तथा विशेष मशीनों की आवश्यकता थी। आंध्र प्रदेश सरकार ने इसी जरूरत को देखते हुए कर्नाटक से सहायता मांगी थी।
कर्नाटक सरकार की ओर से भेजे जा रहे दल में 500 प्रशिक्षित लाइनमैन के अलावा 15 विशेष ट्रक और 25 ट्रैक्टर पर लगी ड्रिलिंग मशीनें शामिल हैं। विशेष ट्रकों में क्रेन और जमीन में गड्ढे करने वाले उपकरण लगाए गए हैं। इनकी सहायता से क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों को हटाने, नए खंभे लगाने और प्रभावित लाइनों की मरम्मत करने में तेजी लाई जा सकेगी।
जानकारी के मुताबिक, राहत कार्यों के लिए कर्मचारियों को दस-दस सदस्यों की टीमों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक टीम की जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर या असिस्टेंट इंजीनियर को सौंपी गई है। इसके अलावा वरिष्ठ इंजीनियरों को निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि मरम्मत का काम व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।
कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज भी सहायता अभियान की निगरानी कर रहे हैं। बिजली वितरण कंपनियों ने आंध्र प्रदेश के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। इससे कर्मचारियों और मशीनों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में भेजने में सुविधा होगी।
कर्नाटक सरकार ने राहत कार्य में तैनात कर्मचारियों की यात्रा, ठहरने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए आकस्मिक खर्च उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूसरे राज्य में काम करने वाले कर्मचारियों को किसी तरह की प्रशासनिक या संसाधनों से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस बीच, चक्रवात 'मुरासु' मंगलवार तड़के आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, तूफान ने नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के पास सुबह करीब 3:30 से 5:30 बजे के दौरान तट पार किया। इस दौरान हवा की रफ्तार लगभग 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रही, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। तूफान के चलते तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश की स्थिति बनी।
चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए राज्य प्रशासन राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, सड़क संपर्क, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाओं को सामान्य करना महत्वपूर्ण चुनौती है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण मरम्मत कार्यों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत भी है।
बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहता। अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति प्रणालियों, संचार सुविधाओं, छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कृषि गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में बिजली व्यवस्था की शीघ्र बहाली से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक से आने वाले प्रशिक्षित कर्मचारियों का सहयोग इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर ये टीमें क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत करेंगी। हालांकि, सभी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह कब तक बहाल हो सकेगी, इसकी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।
केंद्र सरकार भी आंध्र प्रदेश में चक्रवात से उत्पन्न हालात पर नजर रख रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बातचीत कर नुकसान और राहत कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने राज्य को आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने लगातार आए चक्रवातों से हुई क्षति और पुनर्वास की चुनौतियों की जानकारी भी केंद्र को दी।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पड़ोसी राज्यों का सहयोग राहत कार्यों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। बिजली कर्मचारियों और विशेष मशीनों की उपलब्धता से प्रभावित राज्य को अपने सीमित संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे मरम्मत और पुनर्बहाली की प्रक्रिया तेज करने में मदद मिल सकती है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी स्पष्ट किया है कि उनका राज्य आंध्र प्रदेश के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि चक्रवात 'मुरासु' से पैदा होने वाली नई चुनौतियों का आकलन करते हुए जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की ओर से व्यक्त आभार को दोनों राज्यों के बीच सहयोग और एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल आंध्र प्रदेश सरकार का मुख्य ध्यान प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द सामान्य बनाने पर केंद्रित है।





