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आंध्र में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन तेज, विशाखापत्तनम बीच पर निकाली रैली

विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश में मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। राज्य सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिलने के विरोध में विशाखापत्तनम में मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों ने समुद्र तट पर रैली निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
यह प्रदर्शन डॉक्टरों की हड़ताल के 10वें दिन आयोजित किया गया। वहीं, राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी सेवाओं के प्रभावित होने का यह तीसरा दिन है। प्रदर्शनकारी डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार से बातचीत और समाधान की मांग कर रहे हैं।
विशाखापत्तनम स्थित आंध्र मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग के दूसरे वर्ष के पीजी छात्र आकाश दिवाकरन ने बताया कि बीच पर निकाली गई यह रैली सरकार तक उनकी चिंताओं को पहुंचाने और जवाब मांगने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर समुदाय लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने और मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले छात्रों एवं डॉक्टरों की समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांगें केवल व्यक्तिगत हित से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से भी संबंधित हैं।
हड़ताल के कारण राज्य के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं के प्रभावित होने को लेकर प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे मजबूरी में आंदोलन कर रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार जल्द बातचीत कर समाधान निकाले।
विशाखापत्तनम में आयोजित रैली के दौरान बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र और जूनियर डॉक्टर शामिल हुए। उन्होंने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। समुद्र तट पर हुए इस प्रदर्शन का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना था।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन उनकी अपनी समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने सरकार से जल्द बैठक बुलाने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
मेडिकल छात्रों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कदम नहीं उठाती है तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि डॉक्टरों ने यह भी कहा कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए वे समाधान चाहते हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें।
दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से अभी तक आंदोलनकारी डॉक्टरों की मांगों पर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और चिकित्सा सेवाओं को सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों का यह आंदोलन अब राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया है। स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े इस मुद्दे को लेकर सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए किया जाना जरूरी है। लंबे समय तक चलने वाली हड़ताल का असर मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।
फिलहाल विशाखापत्तनम समेत राज्य के अन्य हिस्सों में डॉक्टरों का विरोध जारी है। अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारी डॉक्टरों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है।





