आंध्र प्रदेश

Hospet : चंद्रबाबू नायडू ने नदियों को जोड़ने की वकालत की

Kavita2
25 Jun 2026 4:36 PM IST
Hospet : चंद्रबाबू नायडू ने नदियों को जोड़ने की वकालत की
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Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: होसपेट में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं को देश के भविष्य के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। गुरुवार को उन्होंने कहा कि यदि गंगा और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ दिया जाए, तो भारत की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता।

यह बयान उन्होंने तुंगभद्रा प्रोजेक्ट के तहत 33 नए क्रेस्ट गेट्स के उद्घाटन के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए दिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में जल संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए नदियों को जोड़ने की परियोजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केन-बेतवा परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की नदियों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिससे जल प्रबंधन को नया आयाम मिला है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि देश में गंगा और कावेरी जैसी बड़ी नदियों को जोड़ दिया जाए, तो यह न केवल जल संकट का समाधान होगा, बल्कि देश के कई राज्यों के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। नायडू ने कहा कि गोदावरी और कावेरी नदियों को जोड़ने से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों की जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के बिना आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना मुश्किल है। उनका कहना था कि नदियों को जोड़ने की परियोजनाएं देश के कृषि क्षेत्र, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

अपने भाषण में उन्होंने वर्तमान जल स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि अल नीनो के प्रभाव के कारण तुंगभद्रा और अलमट्टी जलाशयों में अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे इस वर्ष जल उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

नायडू ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जल संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना आवश्यक है, ताकि आने वाले समय में किसी भी प्रकार के जल संकट से बचा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाकर ही जल समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि देश के विभिन्न हिस्सों में जल असंतुलन एक बड़ी चुनौती है, जहां कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक पानी होता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में गंभीर सूखा पड़ता है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए नदियों को जोड़ने की परियोजनाएं एक प्रभावी समाधान हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना न करना पड़े। नायडू के अनुसार, यह समय दूरदर्शी योजना बनाने का है, जिससे देश के सभी हिस्सों को समान रूप से जल संसाधनों का लाभ मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान तुंगभद्रा प्रोजेक्ट के नए क्रेस्ट गेट्स का उद्घाटन भी किया गया, जिसे क्षेत्र में जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जल नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

स्थानीय स्तर पर इस कार्यक्रम को विकास और जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों को जोड़ने जैसी बड़ी परियोजनाओं पर विचार करना लंबे समय में देश की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल, चंद्रबाबू नायडू के इस बयान ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर नदी जोड़ो परियोजनाओं पर बहस को तेज कर दिया है। उनके सुझाव को लेकर विभिन्न राज्यों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस तरह की परियोजनाएं वास्तव में भारत के जल संकट का समाधान बन सकती हैं।

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