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- मदनपल्ले में शुरू होगा...

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अमरावती। आंध्र प्रदेश में बागवानी क्षेत्र को बड़े औद्योगिक और निर्यात नेटवर्क में बदलने की दिशा में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को बड़ा कदम उठाया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण अन्नमय्या जिले के मदनपल्ले में ‘ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब’ परियोजना की शुरुआत करेंगे। करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली इस योजना को तीन चरणों में लागू करने की तैयारी है।
परियोजना का मकसद रायलसीमा और आसपास के क्षेत्रों को देश के प्रमुख बागवानी उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात केंद्रों में विकसित करना है। इसके तहत किसानों को फसल उत्पादन से लेकर ग्रेडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात बाजार तक एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार इसे केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने की परियोजना नहीं, बल्कि पूरी बागवानी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजना के रूप में आगे बढ़ा रही है।
योजना के तहत करीब 40,352 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निवेश प्रस्तावित है, जबकि लगभग 60,000 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र से जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। तीन साल की योजना में सिंचाई क्षेत्र के लिए करीब 20,884 करोड़ रुपये, बागवानी विकास के लिए 14,906 करोड़ रुपये और ग्रामीण सड़कों के लिए 4,562 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान बताया गया है।
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के दायरे में अनंतपुर, अन्नमय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंड्याल, श्री सत्य साईं, तिरुपति, कडप्पा, प्रकाशम और मरकापुरम जिले शामिल किए गए हैं। इन 10 जिलों के 303 मंडलों और 5,869 गांवों में 201 बागवानी क्लस्टर विकसित किए जाने की योजना है।
राज्य सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों में बागवानी के मौजूदा क्षेत्र को तेजी से बढ़ाना है। वर्तमान योजना के अनुसार खेती का क्षेत्र लगभग 8.41 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 14.41 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही फलों, सब्जियों और दूसरी बागवानी फसलों का उत्पादन भी बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी की गई है।
परियोजना से करीब 9.6 लाख किसानों को लाभ मिलने का अनुमान है। इसमें आम, केला, टमाटर, अनार, ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो समेत कई उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके साथ ही किसानों की फसल को बाजार तक पहुंचाने के लिए कोल्ड चेन, वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मदनपल्ले को इस परियोजना का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। यह क्षेत्र पहले से ही टमाटर, इमली और आम समेत कई बागवानी उत्पादों के लिए जाना जाता है। सरकार का मानना है कि यहां मौजूद उत्पादन आधार को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और प्रोसेसिंग सुविधाओं से जोड़कर किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
परियोजना में सिंचाई व्यवस्था पर भी बड़ा ध्यान दिया गया है। रायलसीमा के कई हिस्से लंबे समय से पानी की कमी और सूखे की समस्या से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में सरकार ने बागवानी विस्तार के साथ लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और पानी की उपलब्धता बढ़ाने को योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया है।
इसके अलावा ग्रामीण सड़क नेटवर्क को बेहतर करने पर भी जोर दिया जाएगा। खेतों से मंडियों, प्रोसेसिंग इकाइयों और गोदामों तक फसल पहुंचाने के लिए बेहतर सड़क संपर्क जरूरी माना गया है। सरकार का लक्ष्य है कि फल और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली उपज को कम समय में बाजार तक पहुंचाया जा सके, जिससे किसानों का नुकसान कम हो।
कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग भी इस परियोजना के प्रमुख हिस्से होंगे। बागवानी उत्पादों में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आधुनिक भंडारण सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके अलावा ग्रेडिंग और पैकेजिंग सुविधाओं के जरिए उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
राज्य सरकार इस परियोजना के जरिए निजी निवेशकों को भी बड़े पैमाने पर आकर्षित करना चाहती है। फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन, निर्यात और एग्री-टेक क्षेत्र की कंपनियों को बागवानी क्लस्टरों से जोड़ने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पहले भी अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि इस क्षेत्र के विकास को वैश्विक बाजार की मांग के अनुसार तैयार किया जाए।
सरकार का लक्ष्य बागवानी उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ाना है। इसके लिए बंदरगाहों और प्रमुख परिवहन गलियारों से बेहतर संपर्क विकसित करने, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने पर काम किया जाएगा।
तीन चरणों में लागू होने वाली इस परियोजना को 2026 से 2029 के बीच आगे बढ़ाने की योजना है। अलग-अलग चरणों में सिंचाई, बागवानी, सड़क, प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं को एक साथ विकसित किया जाएगा, ताकि किसानों को पूरे सप्लाई चेन का लाभ मिल सके।
2 अक्टूबर को मदनपल्ले में होने वाले कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण परियोजना की आधारशिला रखेंगी। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। राज्य सरकार इस परियोजना को रायलसीमा की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव की योजना के रूप में पेश कर रही है।
अगर प्रस्तावित निवेश और बुनियादी ढांचा तय समय में जमीन पर उतरता है तो यह परियोजना आंध्र प्रदेश में बागवानी उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात को बड़े स्तर पर बदल सकती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों को केवल कच्ची फसल बेचने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें मूल्य संवर्धन और वैश्विक बाजार से जोड़ना है।
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