आंध्र प्रदेश

नेल्लोर में सूखे को लेकर घिरी सरकार YSRCP ने उठाए सवाल

Ratna Netam
5 Oct 2026 3:19 PM IST
नेल्लोर में सूखे को लेकर घिरी सरकार YSRCP ने उठाए सवाल
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नेल्लोर: आंध्र प्रदेश में सूखे की स्थिति को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार और विपक्षी युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। YSRCP ने आरोप लगाया है कि श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोर जिले के किसी भी मंडल को सूखा प्रभावित सूची में शामिल नहीं किया गया है, जबकि जिले में बारिश की कमी और कृषि क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और सरकार से प्रभावित किसानों के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
पार्टी नेताओं ने सोमवार को ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने गठबंधन सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नेल्लोर जिले की मौजूदा स्थिति का उचित आकलन नहीं किया गया है। YSRCP नेताओं का कहना है कि सूखे जैसे गंभीर मुद्दे पर मंडलों को सूची में शामिल नहीं किए जाने से प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है।
आंध्र प्रदेश के आधिकारिक मौसम आंकड़ों के अनुसार 3 अक्टूबर 2026 तक श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोर जिले में 1 जून से अब तक 210 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश 337.7 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यह सामान्य से 37.8 प्रतिशत कम है। ऐसे में बारिश की कमी के आंकड़े यह दिखाते हैं कि जिले में मौसम संबंधी दबाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, किसी मंडल को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया अलग-अलग मानकों और स्थानीय आकलन पर निर्भर करती है।
YSRCP नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश की कृषि स्थिति को लेकर लोगों के सामने पूरी तस्वीर नहीं रखी। पार्टी के अनुसार, जिले में किसानों की समस्याओं और मंडल स्तर पर सूखे की स्थिति को सरकार के सामने प्रभावी तरीके से उठाया जाना चाहिए था।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आंध्र प्रदेश के दौरे पर थे। 4 अक्टूबर को उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ गुंटूर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण 2.0 के तहत तीन लाख मकानों के लिए पहली किश्त की स्वीकृति और आवास कार्यक्रम से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया। केंद्र के अनुसार इन तीन लाख मकानों की लागत 3,600 करोड़ रुपये है। इसी कार्यक्रम में ग्रामीण आवास के लिए 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट की भी शुरुआत की गई।
YSRCP ने इसी आवास कार्यक्रम को लेकर भी गठबंधन सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि गरीबों के लिए पूर्ववर्ती वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के कार्यकाल में मंजूर किए गए मकानों का श्रेय मौजूदा सरकार लेने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने दावा किया कि पिछली सरकार के समय बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत किए गए थे और अब उन्हीं योजनाओं के लाभार्थियों को मौजूदा सरकार के कार्यक्रमों के तहत सामने लाया जा रहा है। YSRCP के मुताबिक, मकानों या पट्टों के दस्तावेजों के स्वरूप में बदलाव कर इसे नई उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है।
YSRCP का यह भी आरोप है कि वर्तमान सरकार ने जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में शुरू की गई आवास परियोजनाओं को पूरी तरह आगे नहीं बढ़ाया और बड़ी संख्या में मकान अलग-अलग चरणों में अधूरे हैं। पार्टी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछली सरकार ने 22,80,358 मकान मंजूर किए थे और नौ लाख से ज्यादा मकान पूरे किए गए थे, जबकि करीब 11 लाख मकान अलग-अलग चरणों में अधूरे बताए गए हैं। ये आंकड़े और आरोप YSRCP की ओर से जारी बयान पर आधारित हैं।
दूसरी ओर, गठबंधन सरकार ग्रामीण आवास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिना रही है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के दौरान कहा है कि सरकार गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। 4 अक्टूबर के कार्यक्रम में उन्होंने 2029 तक राज्य में गरीबों के लिए व्यापक आवास कवरेज का लक्ष्य भी बताया। केंद्र ने आंध्र प्रदेश के लिए पहले प्रस्तावित 75-76 हजार मकानों की तुलना में तीन लाख मकानों का आवंटन मंजूर किए जाने की जानकारी दी है।
नेल्लोर में सूखे को लेकर YSRCP पहले भी आवाज उठाती रही है। सितंबर में पार्टी की एक बैठक में नेल्लोर के नेता काकानी गोवर्धन रेड्डी ने सिंचाई प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे धान किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी ने उस समय भी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित करने और किसानों के लिए राहत उपायों की मांग की थी।
पार्टी का कहना है कि सूखे का आकलन केवल बारिश की कमी के आधार पर नहीं, बल्कि खेती का रकबा, फसल नुकसान, जल उपलब्धता और किसानों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। YSRCP ने सरकार से मांग की कि नेल्लोर जिले के मंडलों की स्थिति का दोबारा आकलन कराया जाए और यदि वे निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं तो उन्हें सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया जाए।
नेल्लोर जिले की आधिकारिक कृषि व्यवस्था में भी सूखे की स्थिति के दौरान मंडल स्तर पर बारिश, सूखे की अवधि, बोए गए क्षेत्र और 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान जैसी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। इससे साफ है कि सूखा घोषित करने के लिए विस्तृत फील्ड असेसमेंट की जरूरत होती है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में YSRCP के आरोप और सरकार की आवास तथा कृषि संबंधी घोषणाएं आमने-सामने हैं। एक ओर विपक्ष जिले में बारिश की कमी और किसानों की परेशानी का हवाला देकर राहत की मांग कर रहा है, वहीं सरकार राज्य में ग्रामीण आवास और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। अब नेल्लोर जिले के मंडलों को सूखा प्रभावित सूची में शामिल किए जाने और किसानों के लिए संभावित राहत को लेकर सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, नेल्लोर में सूखे की स्थिति और सरकारी आवास योजनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। YSRCP ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मंडलों को सूखा प्रभावित सूची में शामिल करने की मांग की है और आवास योजनाओं का श्रेय लेने का आरोप लगाया है। वहीं आधिकारिक आंकड़े जिले में 37.8 प्रतिशत बारिश की कमी दिखा रहे हैं। ऐसे में आगे होने वाला प्रशासनिक आकलन और सरकार की ओर से लिया जाने वाला फैसला इस विवाद में महत्वपूर्ण होगा।
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