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अमरावती। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने रविवार को राज्य के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले में भारी गिरावट का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकारी स्कूलों में नामांकन की स्थिति सरकार की ओर से किए जा रहे दावों के विपरीत है। उनके आरोपों पर सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी का आकलन करने के लिए 2023-24 और 2025-26 के UDISE+ आंकड़ों की तुलना की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, दोनों शैक्षणिक वर्षों के आंकड़ों में सरकारी विद्यालयों में नामांकन में गिरावट दिखाई देती है।
UDISE+ आंकड़ों को बनाया आधार
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने दावे के समर्थन में शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ डेटा का उल्लेख किया। UDISE+ यानी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस देश में स्कूली शिक्षा से जुड़े विभिन्न आंकड़ों को एकत्र करने वाली प्रमुख व्यवस्था है। इसमें विद्यार्थियों के नामांकन, स्कूलों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़ी अन्य जानकारियां शामिल होती हैं।
जगन ने कहा कि 2023-24 में उनकी सरकार के कार्यकाल के अंतिम वर्ष के दौरान सरकारी स्कूलों में जो नामांकन था, उसकी तुलना 2025-26 के आंकड़ों से करने पर स्थिति में गिरावट नजर आती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों की संख्या को लेकर जो तस्वीर पेश कर रही है, आधिकारिक आंकड़े उससे अलग कहानी बताते हैं।
सरकार के दावों पर उठाए सवाल
YSRCP प्रमुख ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल योजनाओं और घोषणाओं के आधार पर शिक्षा व्यवस्था की सफलता का आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्कूलों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले बच्चों की संख्या और उनमें होने वाले बदलाव को देखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ना शिक्षा व्यवस्था में लोगों के भरोसे का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यदि विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है तो सरकार को इसके कारणों की पहचान करनी चाहिए।
जगन ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में कथित गिरावट क्यों आई और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक बहस तेज
आंध्र प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। पिछली YSRCP सरकार ने सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे और अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा को लेकर कई योजनाएं शुरू की थीं। वहीं मौजूदा TDP नेतृत्व वाली सरकार भी शिक्षा क्षेत्र में सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करती रही है।
ऐसे में सरकारी स्कूलों में नामांकन को लेकर सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। विपक्षी पार्टी का कहना है कि आंकड़े सरकार के दावों की वास्तविकता सामने ला रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से फिलहाल इस आरोप पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
2023-24 और 2025-26 के आंकड़ों की तुलना
जगन मोहन रेड्डी ने विशेष रूप से 2023-24 और 2025-26 के आंकड़ों की तुलना करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि इस तुलना से सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में हुए बदलाव का स्पष्ट आकलन किया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कार्यकाल के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षा को लेकर किए गए सुधारों का असर विद्यार्थियों के नामांकन में दिखाई देता था। मौजूदा स्थिति में कथित गिरावट को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
हालांकि, UDISE+ के आंकड़ों में होने वाले साल-दर-साल बदलाव को समझने के लिए स्कूलों की संख्या, निजी स्कूलों में नामांकन, विद्यार्थियों के स्थानांतरण, जनसंख्या में बदलाव और डेटा संग्रह की प्रक्रिया जैसे कई पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। केवल नामांकन में कमी के आधार पर शिक्षा की पूरी गुणवत्ता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
TDP की प्रतिक्रिया का इंतजार
जगन मोहन रेड्डी के आरोपों के बाद सत्तारूढ़ TDP की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार UDISE+ के आंकड़ों की व्याख्या किस तरह करती है और विपक्ष के दावों पर उसका क्या जवाब होता है।
सरकार यदि आंकड़ों को अलग संदर्भ में प्रस्तुत करती है या नामांकन में बदलाव के पीछे अन्य कारण बताती है, तो इससे राज्य में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को नया आधार मिल सकता है।
सरकारी स्कूलों की स्थिति पर फोकस जरूरी
आंध्र प्रदेश में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों से है। नामांकन में कमी होने पर इसके कारणों की पहचान करना जरूरी है। स्कूलों में सुविधाएं, शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षा की गुणवत्ता, परिवहन, अभिभावकों की प्राथमिकताएं और निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने UDISE+ के आंकड़ों को आधार बनाकर सरकार से जवाबदेही की मांग की है। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से प्रतिक्रिया आने के बाद ही इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल, 2023-24 और 2025-26 के बीच सरकारी स्कूलों में नामांकन में कथित गिरावट को लेकर आंध्र प्रदेश में सियासी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल के तौर पर देख रहा है, जबकि आधिकारिक आंकड़ों की विस्तृत व्याख्या और सरकार की प्रतिक्रिया से ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।





