आंध्र प्रदेश

ई-कचरे से पर्यावरण को बड़ा खतरा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छात्रों से की खास अपील

Tulsi Rao
7 Nov 2026 5:05 PM IST
ई-कचरे से पर्यावरण को बड़ा खतरा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छात्रों से की खास अपील
x

विजयवाड़ा। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरा यानी ई-वेस्ट पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (APPCB) के अध्यक्ष पी. कृष्णैया ने छात्रों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग और उनके निपटान में जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है और छात्र जागरूकता फैलाकर ई-कचरे की समस्या को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

शुक्रवार को विजयवाड़ा के स्टेला कॉलेज में 'आओ इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम करें और पर्यावरण की रक्षा करें' विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृष्णैया ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे से होने वाले नुकसान और उसके सुरक्षित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। तकनीक ने लोगों के जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ पुराने और खराब उपकरणों के रूप में निकलने वाला इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी तेजी से बढ़ रहा है।

कृष्णैया ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिना किसी सावधानी के सामान्य कचरे में फेंकना पर्यावरण के लिए खतरनाक हो सकता है। खराब और अनुपयोगी उपकरणों में मौजूद हानिकारक पदार्थ उचित प्रबंधन के अभाव में हवा, मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे का अनुचित निपटान केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए लोगों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग से लेकर उनके अंतिम निपटान तक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

कार्यक्रम में कृष्णैया ने कहा कि ई-कचरे की समस्या से निपटना केवल सरकारी संस्थाओं या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका समझनी होगी। विशेष रूप से विद्यार्थियों को जागरूक होकर अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के बारे में बताना चाहिए।

उन्होंने ई-कचरे को कम करने के लिए तीन महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर जोर दिया। इनमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कम करना, खराब उपकरणों की मरम्मत कराना और उपयोग योग्य उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल करना शामिल है।

कृष्णैया ने छात्रों को सलाह दी कि वे आवश्यकता के बिना नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदने से बचें। कई बार लोग पुराने उपकरण सही स्थिति में होने के बावजूद नए मॉडल खरीद लेते हैं। इससे अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या बढ़ती है और कचरे के प्रबंधन की चुनौती भी गंभीर होती जाती है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मोबाइल फोन, कंप्यूटर या अन्य उपकरण में छोटी तकनीकी खराबी आ जाती है, तो उसे तुरंत बदलने के बजाय मरम्मत कराने का विकल्प अपनाना चाहिए। समय पर मरम्मत से उपकरणों की उपयोग अवधि बढ़ाई जा सकती है और नए इलेक्ट्रॉनिक कचरे को बनने से रोका जा सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। ऐसे उपकरण जो एक व्यक्ति के लिए अनुपयोगी हो गए हों, लेकिन अच्छी स्थिति में हों, उनका आवश्यकता के अनुसार दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

कृष्णैया ने स्पष्ट किया कि पूरी तरह खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले में या सामान्य घरेलू कचरे के साथ नहीं फेंकना चाहिए। ऐसे उपकरणों को उचित रीसाइक्लिंग व्यवस्था के माध्यम से निपटान के लिए सौंपना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित रीसाइक्लिंग से इलेक्ट्रॉनिक कचरे में मौजूद उपयोगी सामग्रियों को अलग किया जा सकता है और हानिकारक पदार्थों के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों से की जा सकती है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल, अनावश्यक खरीदारी से बचना और खराब उपकरणों को उचित स्थान पर जमा करना ऐसे कदम हैं, जिन्हें दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है।

जागरूकता कार्यक्रम में मोहम्मद फातिमा ने भी भाग लिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण बनाए रखने के लिए लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

पर्यावरण अभियंता पी. श्रीनिवास ने विद्यार्थियों से इलेक्ट्रॉनिक कचरे के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपने आसपास के क्षेत्रों में प्रभावी कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित निपटान के महत्व को समझने और दूसरों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में स्टेला कॉलेज डिग्री की उप-प्रिंसिपल डॉ. एस. आशा, रसायन विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. एस. वाणीलता और वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रमुख टी. किरणमयी सहित कॉलेज के संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के बढ़ते खतरे से अवगत कराना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि यदि युवा पीढ़ी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग में सावधानी बरते और सुरक्षित निपटान की आदत विकसित करे, तो ई-कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

Next Story