- Home
- /
- राज्य
- /
- आंध्र प्रदेश
- /
- सूखे का असर गणेश उत्सव...
सूखे का असर गणेश उत्सव पर भी, रायलसीमा में पानी की कमी से विसर्जन को लेकर बढ़ी परेशानी

अमरावती। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में लंबे समय से जारी पानी की कमी का असर अब गणेश उत्सव पर भी दिखाई देने लगा है। बारिश नहीं होने और जलस्रोतों के सूखने के कारण गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन में श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई जगहों पर भक्तों को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कुछ क्षेत्रों में श्रद्धालु सूखी नदियों, खाली झीलों और तालाबों के किनारे ही प्रतिमाएं छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर रायलसीमा क्षेत्र के कई इलाकों के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सूखे जलाशयों और नदी किनारों पर बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं रखी हुई दिखाई दे रही हैं। इन तस्वीरों ने क्षेत्र में पानी की कमी की गंभीर स्थिति को उजागर किया है।
रायलसीमा क्षेत्र लंबे समय से कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों से जूझता रहा है। इस बार भी मानसून की कमजोर स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश नहीं होने के कारण कई छोटे-बड़े जलस्रोतों में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों, झीलों और तालाबों में किया जाता है। लेकिन इस बार कई स्थानों पर जलस्रोत सूखे पड़े हैं, जिसके कारण परंपरागत तरीके से विसर्जन करना संभव नहीं हो पा रहा है।
कई श्रद्धालुओं ने प्रशासन से भी वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन के लिए सुरक्षित और उचित विसर्जन स्थल उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि आस्था से जुड़ी परंपराओं को पूरा किया जा सके।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल रायलसीमा क्षेत्र में बारिश की कमी के पीछे कई मौसमी कारण जिम्मेदार हैं। अल नीनो (El Nino) प्रभाव के कारण मानसून की स्थिति प्रभावित होने की बात कही जा रही है, जिससे कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई है।
बारिश की कमी का सीधा असर कृषि और ग्रामीण जीवन पर पड़ा है। किसानों को फसलों को लेकर चिंता बनी हुई है, वहीं आम लोगों को पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गणेश उत्सव के दौरान सामने आई यह स्थिति अब जल संकट की गंभीरता को भी दिखा रही है। जहां हर साल बड़े उत्साह के साथ विसर्जन कार्यक्रम आयोजित होते थे, वहीं इस बार पानी की कमी के कारण लोगों को अलग-अलग विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए उचित व्यवस्था जरूरी है, ताकि जलस्रोतों को नुकसान न पहुंचे। सूखे क्षेत्रों में प्रशासन को कृत्रिम टैंक या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।
स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक सभी क्षेत्रों के लिए व्यापक व्यवस्था की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं को वैकल्पिक विसर्जन स्थलों की ओर भेजने की व्यवस्था किए जाने की बात कही जा रही है।
रायलसीमा के लोगों के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन की समस्या नहीं है, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते जल संकट का संकेत भी है। सूखे नदी-तालाब और खाली जलाशय आने वाले समय में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं।
गणेश उत्सव के दौरान सामने आए इन हालातों ने एक बार फिर जल संरक्षण और बेहतर जल प्रबंधन की जरूरत को सामने रखा है। स्थानीय लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश हो और क्षेत्र के सूखे जलस्रोत फिर से भर सकें।
फिलहाल रायलसीमा में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर बनी स्थिति ने लोगों और प्रशासन दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। पानी की कमी के कारण प्रभावित हुई यह परंपरा क्षेत्र में जारी जल संकट की गंभीर तस्वीर पेश कर रही है।





