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आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर विवाद
Ratna Netam
10 Oct 2026 8:35 PM IST

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अमरावती। आंध्र प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के राज्य महासचिव और विधान परिषद सदस्य (MLC) लेल्ला अप्पी रेड्डी ने शनिवार को राज्य चुनाव आयोग से मांग की कि 15 जुलाई 2026 तक भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में शामिल किए गए सभी पात्र नागरिकों के नाम स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची में भी शामिल किए जाएं। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची तैयार करने के लिए निर्धारित आधार तिथि पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।अप्पी रेड्डी ने अपने ज्ञापन में कहा कि राज्य चुनाव आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए 5 फरवरी 2026 की मतदाता सूची को आधार बनाने का संकेत दिया है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 5 फरवरी के बाद और 15 जुलाई तक बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों के नाम निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में विधिवत रूप से शामिल किए गए थे। ऐसे में इन मतदाताओं को स्थानीय निकाय चुनावों की सूची से बाहर रखना उचित नहीं होगा।
मतदाता सूची को लेकर YSRCP ने उठाए सवाल
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए वाईएसआरसीपी ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।पार्टी के वरिष्ठ नेता लेल्ला अप्पी रेड्डी ने राज्य चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि मतदाता सूची में शामिल सभी पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों का ध्यान रखा जाए।उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करते समय केवल 5 फरवरी 2026 तक दर्ज नामों को आधार बनाने से बाद में पंजीकृत मतदाताओं के सामने समस्या पैदा हो सकती है।उनके अनुसार, 15 जुलाई तक निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में शामिल किए गए पात्र नागरिकों के नाम भी स्थानीय निकाय चुनावों की सूची में होने चाहिए।हालांकि, अंतिम मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया संबंधित चुनावी नियमों और आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही पूरी होगी।
राज्य चुनाव आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
वाईएसआरसीपी नेता ने अपनी मांगों को लेकर राज्य चुनाव आयुक्त को लिखित ज्ञापन सौंपा।इस ज्ञापन में उन्होंने मतदाता सूची की आधार तिथि और बाद में पंजीकृत नागरिकों की स्थिति का मुद्दा उठायाअप्पी रेड्डी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में विधिवत शामिल नागरिकों के नाम स्थानीय निकाय चुनावों की सूची में भी दर्ज होने चाहिए।उन्होंने राज्य चुनाव आयोग से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया।ज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची तैयार करते समय पात्र नागरिकों के नाम अनावश्यक रूप से छूट न जाएं।
5 फरवरी की मतदाता सूची को आधार बनाने पर आपत्ति
लेल्ला अप्पी रेड्डी के अनुसार, राज्य चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए 5 फरवरी 2026 की मतदाता सूची को आधार माना जाएगा।वाईएसआरसीपी नेता ने इसी प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि फरवरी के बाद भी मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया के तहत पात्र नागरिकों के नाम सूची में जोड़े गए थे।यदि स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची में इन नामों को शामिल नहीं किया गया, तो ऐसे नागरिकों को मतदान के अवसर से वंचित होना पड़ सकता है।हालांकि, आयोग ने इस विषय में अंतिम रूप से क्या निर्देश जारी किए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
15 जुलाई तक पंजीकृत मतदाताओं को शामिल करने की मांग
वाईएसआरसीपी की प्रमुख मांग है कि 15 जुलाई 2026 तक भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में शामिल सभी पात्र नागरिकों के नाम स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची में भी दर्ज किए जाएं।अप्पी रेड्डी ने कहा कि 5 फरवरी से 15 जुलाई के बीच कई पात्र नागरिकों का पंजीकरण हुआ था।उन्होंने इन नागरिकों के नामों को भी चुनावी प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता बताई।उनके अनुसार, मतदाता सूची तैयार करते समय बाद में हुए वैध पंजीकरणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।इस मांग का सीधा संबंध उन मतदाताओं से है, जिनके नाम फरवरी की सूची में नहीं थे, लेकिन जुलाई तक आधिकारिक सूची में शामिल हो गए थे।
विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया का भी किया उल्लेख
लेल्ला अप्पी रेड्डी ने अपने ज्ञापन में विशेष गहन संशोधन यानी एसआईआर की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि संबंधित अवधि के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया शुरू हुई थी।उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान यह धारणा बनी थी कि मतदाता पंजीकरण रोक दिया गया है।हालांकि, उन्होंने दावा किया कि 5 फरवरी के बाद और 15 जुलाई तक कई पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में विधिवत रूप से जोड़े गए थे।इसी आधार पर उन्होंने मांग की कि ऐसे नागरिकों को स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची में शामिल किया जाए।विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया और सामान्य मतदाता पंजीकरण से संबंधित वास्तविक स्थिति चुनाव आयोग के आधिकारिक अभिलेखों तथा निर्देशों से स्पष्ट होगी।
स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता सूची का महत्व
स्थानीय निकाय चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।इन चुनावों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों का चयन किया जाता है।ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के नामों का सही पंजीकरण आवश्यक होता है।यदि किसी पात्र नागरिक का नाम संबंधित चुनाव की अंतिम मतदाता सूची में नहीं होता, तो मतदान के समय उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।इसी कारण मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों, आधार तिथियों और वैध पंजीकरणों का विशेष महत्व रहता है।आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए राज्य चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
चुनाव आयोग के फैसले पर रहेंगी निगाहें
वाईएसआरसीपी नेता द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब इस मामले में राज्य चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।आयोग को स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची तैयार करने के संबंध में लागू कानूनी प्रावधानों और चुनावी कार्यक्रम को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होगा।लेल्ला अप्पी रेड्डी ने आयोग से 15 जुलाई तक शामिल किए गए पात्र मतदाताओं के नामों को सूची में स्थान देने की मांग की है।हालांकि, इस मांग पर आयोग की ओर से किसी अंतिम निर्णय की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि राज्य चुनाव आयोग मतदाता सूची की प्रस्तावित आधार तिथि में बदलाव करेगा या नहीं।
पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर जोर
वाईएसआरसीपी ने इस मामले को पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों से जोड़कर उठाया है।पार्टी का कहना है कि निर्धारित अवधि के दौरान वैध रूप से पंजीकृत मतदाताओं को स्थानीय निकाय चुनावों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए।अप्पी रेड्डी ने राज्य चुनाव आयोग से इस संबंध में उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।उनकी मांग का मुख्य आधार यह है कि 5 फरवरी के बाद भी निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में नए नाम जोड़े गए थे।अब आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची तैयार करते समय इन नामों को किस प्रकार शामिल किया जाएगा, यह आयोग की आगे की प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।फिलहाल आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची की आधार तिथि और नए पंजीकृत मतदाताओं को शामिल करने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
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