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अमरावती/विजयवाड़ा। भारतीय तीरंदाजी के शीर्ष खिलाड़ी धीरज बोम्मादेवरा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने मैक्सिको के साल्टिलो में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप फाइनल के पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। धीरज यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले भारत के पहले पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे देश के लिए गौरव का क्षण बताया है।
धीरज ने फाइनल मुकाबले में जापान के जुन्या नाकानिशी को बेहद रोमांचक शूट-ऑफ में पराजित किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला शुरुआत से ही कड़ा रहा और नियमित सेटों के बाद विजेता का फैसला नहीं हो सका। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ तक पहुंचा। निर्णायक मौके पर धीरज ने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और सटीक निशाना लगाकर 6-5 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
विश्व कप फाइनल को तीरंदाजी की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। इसमें पूरे सत्र के दौरान शानदार प्रदर्शन करने वाले चुनिंदा तीरंदाजों को ही खेलने का अवसर मिलता है। ऐसे में धीरज का स्वर्ण पदक जीतना भारतीय तीरंदाजी के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। उनकी जीत ने यह भी साबित कर दिया कि भारतीय रिकर्व तीरंदाज दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने और बड़े मुकाबलों में जीत हासिल करने की क्षमता रखते हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने धीरज की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विजयवाड़ा के तीरंदाजी मैदानों से अपना सफर शुरू करने वाले बोम्मादेवरा ने मैक्सिको में वैश्विक मंच पर इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री ने धीरज की लगन, मेहनत और दबाव में शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि आंध्र प्रदेश के साथ पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।
नायडू ने कहा कि धीरज की सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। सीमित संसाधनों और कड़े मुकाबले के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना उनकी प्रतिभा और अनुशासन का प्रमाण है। उन्होंने धीरज के भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वह आने वाली प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए पदक जीतते रहेंगे।
धीरज का सफर विजयवाड़ा से शुरू हुआ था। स्थानीय मैदानों पर तीरंदाजी की बारीकियां सीखते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के दम पर वह भारतीय रिकर्व तीरंदाजी के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए। विश्व कप फाइनल में मिली यह जीत उनके खेल जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाएगी।
धीरज इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने 2024 के पेरिस ओलंपिक में भी हिस्सा लिया था। मिश्रित टीम स्पर्धा में अंकिता भकत के साथ उन्होंने भारत को पहली बार ओलंपिक तीरंदाजी के पदक मुकाबले तक पहुंचाया था। हालांकि भारतीय जोड़ी उस समय कांस्य पदक जीतने से चूक गई थी। उस अनुभव के बाद धीरज ने अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया और अब विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित कर दी।
इससे पहले जून 2026 में अंताल्या में आयोजित विश्व कप चरण में भी धीरज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने मिश्रित टीम स्पर्धा में भी सोना हासिल किया था। पूरे सत्र में लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें विश्व कप फाइनल में स्थान मिला और उन्होंने इस अवसर को ऐतिहासिक सफलता में बदल दिया।
जापान के जुन्या नाकानिशी के खिलाफ खेला गया फाइनल धैर्य और मानसिक मजबूती की परीक्षा रहा। दोनों तीरंदाजों ने लगातार सटीक निशाने लगाए। मुकाबला बराबरी पर पहुंचने के बाद दबाव और बढ़ गया था, लेकिन धीरज ने निर्णायक तीर पर नियंत्रण बनाए रखा। शूट-ऑफ में मिली जीत ने उन्हें भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी का पहला विश्व कप फाइनल चैंपियन बना दिया।
धीरज की इस उपलब्धि से भारतीय तीरंदाजी को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतते रहे हैं, लेकिन पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में विश्व कप फाइनल का स्वर्ण पदक अब तक भारत की पहुंच से दूर था। धीरज ने इस इंतजार को समाप्त करते हुए नई पीढ़ी के तीरंदाजों के सामने एक बड़ा लक्ष्य स्थापित किया है।
उनकी जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय तीरंदाजी के बढ़ते स्तर का संकेत भी है। धीरज की सफलता से देश में खेल से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और युवा प्रतिभाओं को अवसर देने की आवश्यकता एक बार फिर सामने आई है। मैक्सिको में तिरंगा ऊंचा करने वाले धीरज अब भारतीय तीरंदाजी के नए स्वर्णिम अध्याय का चेहरा बन गए हैं।





