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आंध्र प्रदेश
लोकतंत्र सिर्फ कागजों पर जगन मोहन रेड्डी ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
Ratna Netam
1 Nov 2026 2:47 PM IST

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आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि लोकतंत्र केवल कागजों पर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश की जा रही है और सत्तारूढ़ गठबंधन के कार्यकर्ता चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। जगन ने चुनाव व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए निर्वाचन अधिकारियों से निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने की अपील की है।दरअसल, रविवार, 1 नवंबर 2026 को आंध्र प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों में मतदान के दौरान राजनीतिक तनाव बढ़ गया। जगन मोहन रेड्डी ने अपने गृह क्षेत्र पुलिवेंदुला में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने नगरपालिका चुनाव में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रभावित मतदान केंद्रों पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की। जगन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर नहीं मिल रहा है और विपक्षी दल के पोलिंग एजेंटों को भी परेशान किया जा रहा है।
80 में से 70 मतदान केंद्रों पर कब्जे का आरोप
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि पुलिवेंदुला नगरपालिका के 80 मतदान केंद्रों में से करीब 70 केंद्रों पर तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कार्यकर्ताओं ने कब्जा जमा लिया। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पोलिंग एजेंटों को मतदान केंद्रों के अंदर प्रवेश नहीं करने दे रहे थे। उनके मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य कथित तौर पर फर्जी मतदान कराना और चुनाव के परिणामों को प्रभावित करना है।जगन ने चुनाव अधिकारियों से उन मतदान केंद्रों पर मतदान रद्द करने की मांग की, जहां उनके अनुसार गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए केवल मतदान करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रत्येक मतदाता बिना किसी दबाव, डर या बाधा के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेने और प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने की मांग की है। हालांकि, मतदान केंद्रों पर कब्जे और पोलिंग एजेंटों को रोकने के आरोप जगन तथा उनकी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
मतदान के दौरान टीडीपी और वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं में झड़प
पुलिवेंदुला में मतदान के दौरान दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, टीडीपी और वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। कडपा जिले में दोनों पक्षों के समर्थकों की ओर से पत्थरबाजी किए जाने की सूचना भी मिली।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। कुर्नूल रेंज के डीआईजी कोया प्रवीण के मुताबिक, पुलिवेंदुला में कानून-व्यवस्था सामान्य बनाए रखने के लिए पुलिस काम कर रही थी। क्षेत्र में लगभग 1,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही थी।राज्यभर में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 4,372 स्थानों पर कुल 36,351 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चलने का कार्यक्रम था।
पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठा चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश की चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी वह राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में कथित रूप से आ रही परेशानियों का मुद्दा उठा चुके हैं। जगन का आरोप रहा है कि कई स्थानों पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया, उनके दस्तावेज छीने गए और कुछ मामलों में नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया।24 अक्टूबर को भी जगन ने चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए अदालत से एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और नामांकन से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया की सीसीटीवी निगरानी कराने की मांग रखी थी।उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन विपक्षी उम्मीदवारों के सामने बाधाएं खड़ी कर रहा है। जगन ने यह भी दावा किया था कि कुछ स्थानों पर महिला उम्मीदवारों को भी कथित तौर पर धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा। इन आरोपों को लेकर उनकी पार्टी ने तस्वीरों और अन्य सामग्री के साथ शिकायतें सामने रखी थीं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी दिया हवाला
चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी चर्चा में हैं। 19 अक्टूबर को वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से उम्मीदवारों की शिकायतों पर ध्यान देने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा था। अदालत ने पुलिस महानिदेशक को नामांकन दाखिल करने जाने वाले उम्मीदवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने, पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और नामांकन केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।इसके साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग और पुलिस से इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई थी। दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा था कि जिन उम्मीदवारों की शिकायतें जिला प्रशासन या पुलिस अधिकारियों तक पहुंची हैं, उनसे संपर्क कर नामांकन दाखिल करने में मदद की जाएगी।
टीडीपी ने भी वाईएसआरसीपी पर लगाए आरोप
इस पूरे विवाद में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। चुनाव से पहले टीडीपी और वाईएसआरसीपी एक-दूसरे पर हिंसा, धमकी और चुनावी प्रक्रिया बाधित करने के आरोप लगा चुके हैं। टीडीपी ने निर्वाचन आयोग को शिकायत देकर वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं पर नामांकन केंद्रों में हिंसा, नेताओं पर हमले और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया था।पार्टी के नेताओं ने वाईएसआरसीपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि विपक्षी दल चुनाव में अपनी संभावित हार से बचने के लिए विवाद खड़ा कर रहा है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है।
चुनावी सुधार की मांग ने बढ़ाई सियासी हलचल
जगन मोहन रेड्डी के ताजा विरोध प्रदर्शन ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा केंद्र में ला दिया है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सत्ता का फैसला जनता के वोट से होना चाहिए, न कि दबाव, डर या कथित चुनावी अनियमितताओं के जरिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से ऐसी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है, जिसमें सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों को समान अवसर मिल सके।अब इस पूरे मामले में राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिवेंदुला में दोबारा मतदान कराने की जगन की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है, इस पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं की भी नजर रहेगी। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और शिकायतों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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