आंध्र प्रदेश

NDA सरकार पर माकपा का हमला, आंदोलन का ऐलान

Ratna Netam
6 Nov 2026 3:22 PM IST
NDA सरकार पर माकपा का हमला, आंदोलन का ऐलान
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अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान कथित हिंसा, धांधली और विपक्षी उम्मीदवारों को डराने-धमकाने के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने राज्य की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने इन मुद्दों के विरोध में 11 नवंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है। माकपा का आरोप है कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सत्ताधारी गठबंधन से जुड़े लोगों ने विपक्षी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को निशाना बनाया। हालांकि, इन आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव अधिकारियों का पक्ष भी अलग है।आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में तेलुगु देशम पार्टी (TDP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनसेना पार्टी का गठबंधन सत्ता में है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सत्ता का दुरुपयोग किया गया है। माकपा ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है।पार्टी का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। यदि किसी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने, प्रचार करने या मतदान के दौरान अपने प्रतिनिधि तैनात करने से रोका जाता है, तो चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
स्थानीय निकाय चुनावों में हिंसा के आरोप
आंध्र प्रदेश में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान कई स्थानों से राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों की खबरें सामने आई थीं। विशेष रूप से कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थकों के बीच तनाव और पथराव की घटनाएं दर्ज की गईं।माकपा ने आरोप लगाया है कि कुछ इलाकों में उसके उम्मीदवारों और मतदान एजेंटों को भी निशाना बनाया गया। पार्टी के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई।पार्टी ने इन घटनाओं को लेकर निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि कई मामलों में शिकायतों के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित अधिकारियों के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
माकपा ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया
CPI(M) की आंध्र प्रदेश इकाई ने स्थानीय निकाय चुनावों में कथित बूथ कब्जाने, फर्जी मतदान और विपक्षी एजेंटों को मतदान केंद्रों से बाहर निकालने की घटनाओं की निंदा की है।पार्टी के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया।माकपा ने तिरुपति, नंद्याल, प्रकाशम और अन्य क्षेत्रों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए संबंधित मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने की मांग भी की है।पार्टी का कहना है कि चुनाव में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
नामांकन के दौरान भी विवाद
स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान से पहले नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी विवाद सामने आए थे। माकपा ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर उसके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने की कोशिश की गईपार्टी के अनुसार, पालनाडू जिले में एमपीटीसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने गए उसके एक पदाधिकारी एस. अंजनेयुलु नाइक पर हमला किया गया था।माकपा के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने उनसे मुलाकात की थी और घटना की निंदा की थी।पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मांग की थी कि सभी उम्मीदवारों को बिना किसी भय और दबाव के चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अवसर दिया जाए।
11 नवंबर के विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य
माकपा के प्रस्तावित राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य चुनावी निष्पक्षता, विपक्षी दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाना है।पार्टी का आरोप है कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर वह व्यापक जनविरोध दर्ज कराना चाहती है।इस आंदोलन के दौरान स्थानीय निकाय चुनावों में कथित हिंसा और अनियमितताओं को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।हालांकि, प्रदर्शन के सभी स्थानों, कार्यक्रमों के समय और भाग लेने वाले संगठनों की विस्तृत सूची की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
वाईएसआर कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
स्थानीय निकाय चुनावों में कथित गड़बड़ियों को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एनडीए सरकार पर आरोप लगाए हैं।पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर उनके समर्थकों और मतदान एजेंटों को मतदान केंद्रों में प्रवेश करने से रोका गया।उन्होंने कथित फर्जी मतदान और बूथ कब्जाने की शिकायतें भी उठाईं। पुलिवेंदुला में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ने पर जगन मोहन रेड्डी ने रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।वाईएसआर कांग्रेस ने प्रभावित मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की थी।
सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष
दूसरी ओर, टीडीपी ने भी वाईएसआर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा के अनुसार, अधिकांश स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा था। कुछ क्षेत्रों से शिकायतें मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।निर्वाचन आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों से प्राप्त शिकायतों की जांच करने की बात कही थी।इससे स्पष्ट है कि स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच और निर्वाचन अधिकारियों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
चुनावी हिंसा पर बढ़ी राजनीतिक तकरार
स्थानीय निकाय चुनावों में हुई झड़पों ने राज्य के राजनीतिक वातावरण को प्रभावित किया है। विपक्षी दल इन घटनाओं को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहे हैं, जबकि सत्ताधारी गठबंधन विपक्ष पर भी चुनावी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगा रहा है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से यह विवाद केवल चुनाव परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचन संस्थाओं की निष्पक्षता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है।किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और मतदान करने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।
अब 11 नवंबर के प्रदर्शन पर नजर
माकपा के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी अपने आंदोलन को किन जिलों और क्षेत्रों में किस रूप में आयोजित करती है।फिलहाल माकपा स्थानीय निकाय चुनावों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार और निर्वाचन अधिकारियों से जवाबदेही की मांग कर रही है।वहीं, प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
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