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Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: नेल्लोर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय सचिव के. रामकृष्ण ने रविवार को केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की नीतियों पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी हो रही है।
नेल्लोर स्थित CPI कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रामकृष्ण ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थागत स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार का ध्यान जनहित के मुद्दों से हटकर राजनीतिक नियंत्रण और सत्ता के केंद्रीकरण की ओर अधिक दिखाई देता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे डराने-धमकाने की राजनीति कर रहे हैं। रामकृष्ण ने कहा कि राजनीतिक असहमति को दबाने और विपक्ष की आवाज को कमजोर करने के प्रयास लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं हैं।
CPI नेता ने यह भी कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार इन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मुद्दों की जगह राजनीतिक एजेंडा को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का भी उल्लेख किया और कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों पर केंद्र सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। रामकृष्ण के अनुसार, ऐसे मामलों में देश की छवि और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब भी भारत की प्रतिष्ठा से जुड़े बयान सामने आते हैं, तो सरकार को सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने इसे कूटनीतिक और राजनीतिक दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) नेता ने यह भी कहा कि देश में विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक बहस और असहमति की जगह सीमित हो रही है। उनके अनुसार, एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सभी विचारों का सम्मान आवश्यक है।
उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की और कहा कि सार्वजनिक नीतियों में पारदर्शिता और भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रामकृष्ण ने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक निर्णयों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है, जिससे नीतियों का संतुलन प्रभावित हो रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रखेगी और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।
कुल मिलाकर, नेल्लोर में दिए गए इस बयान ने राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है, जहां विपक्ष सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नेल्लोर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय सचिव के. रामकृष्ण ने रविवार को केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की नीतियों पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी हो रही है।
नेल्लोर स्थित CPI कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रामकृष्ण ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थागत स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार का ध्यान जनहित के मुद्दों से हटकर राजनीतिक नियंत्रण और सत्ता के केंद्रीकरण की ओर अधिक दिखाई देता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे डराने-धमकाने की राजनीति कर रहे हैं। रामकृष्ण ने कहा कि राजनीतिक असहमति को दबाने और विपक्ष की आवाज को कमजोर करने के प्रयास लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं हैं।
CPI नेता ने यह भी कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार इन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मुद्दों की जगह राजनीतिक एजेंडा को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का भी उल्लेख किया और कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों पर केंद्र सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। रामकृष्ण के अनुसार, ऐसे मामलों में देश की छवि और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब भी भारत की प्रतिष्ठा से जुड़े बयान सामने आते हैं, तो सरकार को सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने इसे कूटनीतिक और राजनीतिक दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) नेता ने यह भी कहा कि देश में विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक बहस और असहमति की जगह सीमित हो रही है। उनके अनुसार, एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सभी विचारों का सम्मान आवश्यक है।
उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की और कहा कि सार्वजनिक नीतियों में पारदर्शिता और भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रामकृष्ण ने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक निर्णयों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है, जिससे नीतियों का संतुलन प्रभावित हो रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रखेगी और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।
कुल मिलाकर, नेल्लोर में दिए गए इस बयान ने राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है, जहां विपक्ष सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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