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पेयजल के लिए जल संसाधनों का संरक्षण करना हर किसी की जिम्मेदारी: तुम्मला

कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने सोमवार को जोर देकर कहा कि 'सुपर अल नीनो' के प्रभाव को देखते हुए, जल संसाधनों का संरक्षण करना सभी की जिम्मेदारी है। इसमें पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
भद्राद्री-कोठागुडेम जिले के अश्वपुरम मंडल में अम्मागारीपल्ली के पास स्थित डुमुगुडेम एनीकट बांध का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कहा कि 'सुपर अल नीनो' का प्रभाव, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन का कारण बन रहा है, कम बारिश के चलते पानी की भारी किल्लत पैदा कर सकता है। आने वाली गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसलिए, हर किसी को जल संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानना चाहिए।
इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार गर्मियों के दौरान बिजली की कमी को रोकने के लिए जरूरी इंतजाम कर रही है। उन्होंने जल और ऊर्जा संसाधनों के प्रबंधन में एहतियाती कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आपस में बेहतर तालमेल बिठाएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की जरूरतें पूरी होने के बाद जो अतिरिक्त पानी बचे, केवल उसी का इस्तेमाल अन्य कार्यों के लिए किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही पर्याप्त पानी नहीं है, तो अन्य कार्यों के लिए इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि डुमुगुडेम बैराज की भंडारण क्षमता 0.8 टीएमसी फीट है, लेकिन अभी इसमें केवल 0.5 टीएमसी फीट पानी ही जमा किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तकनीकी पहलुओं का आकलन करें ताकि रेत की बोरियों (सैंडबैग्स) का इस्तेमाल करके पानी के भंडारण को अधिकतम किया जा सके।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मौजूदा मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही फसल उगाने का फैसला लें। खेती में प्रति एकड़ दो से तीन लाख रुपये तक का निवेश लग सकता है, इसलिए किसानों को फसल चुनते समय पानी, बिजली और भूजल संसाधनों की उपलब्धता पर जरूर विचार करना चाहिए।





